दलाल बाग में राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा. का युवाओं को प्रेरक आशीर्वचन-चातुर्मास की विशाल धर्मसभा में उमड़ा युवाओं का सैलाब

इंदौर किसी भी राष्ट्र और समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी तरुणाई होती है। आज समाज के युवाओं को राष्ट्रीय एकता संघ बनाकर सबको एक जाजम पर संगठित होने की जरूरत है। देश तो एक है ही लेकिन राष्ट्रीय एकता एवं चेतना की दृष्टि से भी युवाओं को संगठित होना होगा। इंदौर में भी जितने मंदिर, युवाओं के संगठन एवं मंडल हैं उन्हें एक संघ में जोड़कर अपनी सेवा गतिविधियाँ चलाना चाहिए। बिना पद और बिना किसी नाम के भी जो लोग जिनशासन की सेवा में जुटे हैं, उनका भी अभिनन्दन करना चाहिए। प्रयास करें कि इंदौर का यह चातुर्मास पूरे शहर का चातुर्मास बने और इसका लाभ जन-जन तक पहुंचे।
ये दिव्य और प्रेरक आशीर्वचन हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने रविवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास की महती धर्मसभा में युवा सम्मेलन में तरुणाई को आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। बड़ी संख्या में युवा एवं मातृशक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। प्रारम्भ में सबसे पहले राष्ट्रसंत के मुखारविंद से महाशांति धारा का परम पुण्यदायी आयोजन सौल्लास सम्पन्न हुआ। राष्ट्रसंत के आशीर्वचन के पश्चात सुबह सुधा का सागर पुस्तक पर आधारित दिलचस्प स्पर्धा भी हुई जिसमें 1000 से अधिक सभी आयु वर्ग के समाज बंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दोपहर में शहर की तरुणाई ने दलाल बाग पहुंचकर राष्ट्रसंत के विशेष प्रवचनों, आशीर्वचन एवं मार्गदर्शन का लाभ उठाया।
आयोजन समिति की ओर से नवीन गोधा, मनीष गोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, आकाश जैन कोयला आदि ने सभी युवाओं की अगवानी की। युवाओं के सम्मेलन में मुनि सेवा संघ, समस्त मुनि सेवा समितियां, सोशल ग्रुप, युवा संगठन, युवा जैन व्यायामशाला एवं सभी जैन युवा संगठनों की सभी टीमों को प.पू. राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा. के पावन सानिध्य में विशेष प्रवचन, आशीर्वचन एवं मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त हुआ। युवाओं को धर्म, संस्कार, सेवा, संगठन एवं राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा से जोड़ने का यह एक दुर्लभ अवसर था जिसमें शहर की समस्त तरुणाई को राष्ट्रसंत की ओर से शुभाशीष भी प्राप्त हुए। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी होंगे।
राष्ट्रसंत ने कहा कि रोटी एक ही होती है लेकिन अंतर यह है कि एक रोटी नौकर बनाता है और एक रोटी माँ। जिस दिन आपने चार की जगह पांच रोटी खा ली उस दिन नौकर का मुंह चढ़ जाएगा जबकि माँ के चेहरे पर प्रसन्नता आ जाएगी। आज सभी दूर इवेंट मैनेजमेंट का काम चल रहा है। यह इवेंट मैनेजमेंट की प्रवृत्ति धार्मिक कार्यों, विशेषकर मंदिरों और महाराज की सेवाओं में नहीं होना चाहिए। राजस्थान में हमने अनेक मंदिरों में इसे बंद करा दिया है। पूजा, अभिषेक आदि अनुष्ठान पुजारी की बजाय स्वयं भक्तों को करना चाहिए। एक चक्रवर्ती मंदिर की झाड़ू लगाए और घर का चौका सेठ-सेठानी संभाले तो यह ज्यादा श्रेयस्कर होगा। केवल पैसों के लिए काम करने वाले लोगों की भावना अर्थ से ही जुडी रहती है। हमें अपने बच्चों में भी ऐसे संस्कार डालना होंगे कि वे धर्म की सेवा करने में स्वयं को प्रफुल्लित महसूस करें। इंदौर का चातुर्मास पूरे इंदौर शहर का है, इसका लाभ सबको मिलना चाहिए।
