दलाल बाग पर चल रहे चातुर्मास के दिव्य और भव्य आयोजन में आज भगवान पारसनाथ को चढ़ेगा तीन सौ किलो का लाडू, शिखरजी की प्रतिकृति बनेगी

इंदौर, दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो भगवान अथवा किसी अदृश्य शक्ति को नहीं मानता हो। हर देश में कोई न कोई अदृश्य शक्ति की मान्यता होती है। भौतिकता आँखों का विषय है और नैतिकता कानों का। कई बार आँखों का देखा गलत भी होता है और कानों का सुना भी कई बार सही होता है। क्रोधी व्यक्ति को कभी सच्चाई नजर नहीं आती। धर्म के क्षेत्र में अक्सर कानों सुना सच होता है। कभी किसी भगवान को हमने मोक्ष जाते समय नहीं देखा, केवल कानों से ही सुन रहे हैं। धर्म में हमेशा कानों सुना ही सच होता है। कोई नहीं जानता कि मोक्ष कहाँ है, सिर्फ कानों सुनी बातों से ही भरोसा करते हैं कि मोक्ष होता है।
संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज ने मंगलवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास के दौरान उपस्थित देशभर से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य एवं प्रेरक विचार व्यक्त किए। संचालन दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद अंतिका गोधा ने किया। प्रारम्भ में आयाती जैन-जैनेश जैन ने कत्थक और तबला के माध्यम से मंगलाचरण किया। श्रीफल अर्पित करने का लाभ सामाजिक संसद के संगठन मंत्री प्रिंसपाल टोंग्या के साथ आयोजन समिति के सदस्यों, अर्चना गोधा एवं सोनाली जैन ने लिया। आभार माना महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन ने।
आज भगवान पारसनाथ का निर्वाण दिवस, शिखरजी की प्रतिकृति का निर्माण – चातुर्मास आयोजन समिति के शिवानी-नवीन गोधा, तृप्ति-हर्ष जैन, अंतिका-आनंद गोधा एवं सपना-मनीष गोधा ने बताया कि बुधवार 19 अगस्त को सुबह 8.30 बजे भगवान पारसनाथ के निर्वाण दिवस पर दलाल बाग में 300 किलो निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा और तीर्थराज सम्मेत शिखर की प्रतिकृति का निर्माण भी किया गया है जिसपर भगवान पारसनाथ की स्वर्ण भद्र कूट पर निर्वाण काण्ड पढ़कर उक्त लाडू चढ़ाया जाएगा। भगवान का महापूजन भी होगा तथा राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. के मुखारविंद से मोक्ष सप्तमी पर विशेष प्रवचन भी होंगे। इसमें भगवान पारसनाथ के पांचों कल्याणक के साथ निर्जल उपवास की साधना करने वाली कन्याओं को भी विशेष प्रवचन दिए जाएँगे। इस मौके पर महिलाओं के लिए लाडू सजावट स्पर्धा भी रखी गई है। पर्यूषण महापर्व पर 15 सितम्बर से श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन भी होगा जिसके लिए पंजीयन प्रारम्भ हो गए हैं। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।
राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि दो नावों में सवार व्यक्ति कभी मंजिल तक नहीं पहुँच सकता। दो सुई से कपडे नहीं सिले जा सकते। कोई व्यक्ति किसी को भगवान नहीं बना सकता, व्यक्ति स्वयं भगवान बन सकता है। आजतक कोई किसी को धर्मात्मा नहीं बना पाया। भगवान बनने के लिए हमें धर्म को मानना पड़ेगा। दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है जो भगवान को नही मानता हो। कोई न कोई अदृश्य शक्ति अवश्य प्रत्येक देश में मानी जाती है, नाम भले ही चाहे जो हो। जैसे शरीर में बैठी आत्मा किसी को नहीं दिखती, उसी तरह कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि भगवान या मंदिर कुछ नहीं होता। धर्म पर कभी सन्देह नहीं करना चाहिए। यह नियम ले लें कि धर्म पर संदेह नहीं करेंगे और कभी ऐसी कोई बात नहीं करेंगे कि भगवान नहीं होते हैं। याद रखें, हम जैसे बचपन से सुन रहे हैं कि ये हमारे माता-पिता है तो मानकर चलें कि मेरे भक्त के माता-पिता नकली नहीं हो सकते। हम उन्हें मानते हैं कि यही हमारे माता-पिता है। हमने कानों से सुनकर ही उन्हें अपना माता-पिता माना है इसलिए आज के बाद भगवान के नहीं होने को लेकर कोई प्रश्न नहीं करना चाहिए।
