सुदामा नगर सेक्टर ए स्थित रामजी सदन पर चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में आशीर्वचन

इंदौर, 26 अक्टूबर। सुख और दुख हमारे कर्मो का ही फल है। हम जैसे कर्म करेंगे, फल भी वैसे ही मिलेंगे। गंगा और अन्य नदियां तभी तक पूजनीय है, जब तक वे अपने किनारों की मर्यादा में बहती है। किनारे छोड़ देने पर कोई भी उन्हें नहीं पूजता क्योंकि तब वही जीवनरेखा विनाश की बाढ़ लेकर आती है। मनुष्य के जीवन का भी यही सिद्धांत है। भगवान के अवतार सज्जनों के कल्याण और दुर्जनों के विनाश के लिए ही होते हैं। भगवान के शब्दकोष में सुख या दुख नाम का कोई शब्द है ही नहीं।
ये दिव्य विचार हैं भागवताचार्य बालव्यास पं. ऋषभदेव महाराज बनारस वालों के, जो उन्होंने सुदामा नगर सेक्टर ए स्थित रामजी सदन, दत्त मंदिर के पास आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान उपस्थित भक्तों को शुकदेव चरित्र प्रसंग एवं भागवत की महत्ता बताते हुए व्यक्त किए। कथा शुभारम्भ के पूर्व श्रीमती मंजुला प्रशांत पांडे, श्रीमती प्रभा पांडे, श्रीमती सोना संजय, अजय एवं प्रिंस पांडे ने व्यास पीठ का पूजन किया। संयोजक श्रीमती मंजुला पांडे ने बताया कि पं. ऋषभदेव प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक व्यास पीठ पर विराजित होकर कथामृत की वर्षा करेंगे। सोमवार 27 अक्टूबर को परीक्षित मिलन एवं सती चरित्र की कथा होगी। मंगलवार को कृष्ण जन्मोत्सव, बुधवार को बाल लीला एवं गोवर्धन पूजन, गुरुवार को रुक्मणी विवाह तथा शुक्रवार को सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष के साथ कथा का समापन होगा। कथा प्रसंगानुसार विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे।
विद्वान वक्ता ने कहा कि भागवत वह कथा है जो जन्म जन्मान्तर के पुण्योदय के बाद नसीब होती है। भागवत को हम चाहे कल्पवृक्ष कह लें या महासागर अथवा सद्गुणों का भंडार – सबका सार यही है कि जीवन को मोक्ष की ओर ले जाना है तो भागवत की शरण जरुरी है। भारत भूमि ही वह स्थान है जहाँ इतनी बड़ी संख्या में देवी-देवता अवतार लेकर इस सृष्टि का संचालन करते हैं।
सलग्न चित्र : सुदन नगर सेक्टर ए स्थित रामजी सदन पर भागवत कथा में संबोधित करते बालव्यास पं. ऋषभदेव महाराज। दूसरे चित्र में व्यास पीठ का पूजन एवं आरती करते श्रद्धालु।
