अखंड रामायण पाठ के साथ शुरू हुआ दो दिवसीय अन्नकूट महोत्सव, मठ स्थित सभी देवताओं का होगा आकर्षक श्रृंगार

इंदौर । एयरपोर्ट रोड, पीलिया खाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर परंपरागत अन्नकूट महोत्सव का आयोजन वैकुंठ चतुर्दशी मंगलवार 4 नवंबर को होगा। मठ के महामंडलेश्वर श्री महंत रामचरण दास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में सोमवार को सुबह अखंड रामायण पाठ एवं अभिषेक के साथ इस दो दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ हुआ। मंगलवार 4 नवंबर को मठ स्थित भगवान पद्मनाभ, रणछोड़जी, टीकमजी एवं पंचमुखी चिंताहरण हनुमानजी का श्रृंगार कर उन्हें शाम 6.30 बजे छप्पन भोग समर्पित कर महाआरती होगी। महाप्रसादी एवं भजन संध्या शाम 7 बजे से शुरू होगी।
मठ के पं. अमितदास ने बताया कि शहर का सबसे बड़ा कडाव हंसदास मठ के पास है और जिस कडाव में अन्नकूट महोत्सव के लिए रामभाजी बनाई जाएगी, उसकी क्षमता 20 हजार लोगों के लिए सब्जी बनाने की है। यह करीब 100 वर्ष पुराना कडाव है। मठ के पास प्राचीन बर्तनों का बड़ा संग्रह है क्योंकि सैंकड़ों वर्षों की परंपरा के अनुरूप सिंहस्थ एवं अन्य उत्सवों के दौरान देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों से आने वाले साधु संत और महात्मा अपनी पूरी मंडली सहित हंसदास मठ पर आकर डेरा डालते थे और उनके लिए भोजन की व्यवस्था यहीं पर की जाती थी। अभी भी यह परंपरा जारी है। इस लिहाज से मठ के पास ऐसे बर्तन हैं जिनमें एक साथ एक समय में 6 से 7 क्विंटल तक भोजन पकाया जा सकता है। इन बर्तनों का उपयोग दाल-चावल और खीर पकाने में भी किया जाता रहा है। मठ पर हजारों लोगों के लिए भोजन निर्माण की परंपरा रही है। शहर में आज भी जहाँ कहीं बड़ा भंडारा या अन्नकूट होता है, तो वे मठ का कडाव मांगकर ले जाते हैं। इतने बड़े कडाव में एक साथ सब्जी बनने से स्वाद में भी एकरूपता रहती है और समय भी कम लगता है। प्राचीन समय में इस कडाव में बनने वाली रामभाजी को लकड़ी के घोटे से घोटकर बनाया जाता था।
मठ की स्थापना सन 1780 में अर्थात आज से करीब 245 वर्ष पूर्व हुई है। तब देवी अहिल्या बाई का शासनकाल था। उस समय उज्जैन, ओम्कारेश्वर जाने-आने वाले साधु महात्माओं के लिए हंसदास मठ पर ही भोजन भंडारे एवं आवास आदि की व्यवस्था होती थी। इस बार अन्नकूट महोत्सव के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। 4 नवंबर को सुबह अखंड रामायणपाठ की पूर्णाहुति होगी। उसके बाद अतिप्राचीन रणछोड़ जी, टीकम जी, पंचमुखी चिंताहरण हनुमान एवं भगवान पद्मनाभ सहितसभी देवालयों में विशेष श्रृंगार, अभिषेक के आयोजन भी होंगे। मठ द्वारा गोशाला, संस्कृत विद्यालय, विद्यार्थी आवास, संत सेवा, कुंभ मुकाम एवं श्री इंदौर डाकोर खालसा सहित विभिन्न सेवा गतिविधियों का नियमित संचालन भी किया जा रहा है।
