
राष्ट्र की चेतना को जगाने वाला गीत है वंदे मातरम- सत्यनारायण सत्तन
भारत की आत्मा है वंदे मातरम गीत, – सुमित मिश्रा
भाजपा द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150 वीं वर्षगाँठ मनाई
वंदे मातरम का सामुहिक गान, राजवाड़ा पर हुए लघु भारत के दर्शन
देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा के समक्ष हजारों नागरिकों ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम का किया गायन
इंदौर। आज भाजपा द्वारा देवी अहिल्या बाई की प्रतिमा के समक्ष राजवाड़ा पर आयोजित राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, मालिनी गौड, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, उषा ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत खरे, सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष प्रताप करोसिया, पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा, सुदर्शन गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, प्रदेश सहमीडिया प्रभारी दीपक जैन टीनू की उपस्थिति में वंदे मातरम का सामुहिक गान किया गया।
इस अवसर पर मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि वंदे मातरम ग्रंथ के साथ साथ मंत्र भी है। वंदे मातरम देशभक्ति की आग है ज्वाला है, वंदे मातरम इस देश को फिर से खड़ा करने का मंत्र है, वंदे मातरम भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने का मंत्र है, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है, कि जब देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण हो तब तक भारत दुनिया के ताकतवर देशों में शामिल हो जाए, यह भारत को ताकतवर बनाने का मंत्र है। यह सामान्य गीत नहीं है, यह भारत माता के चरणों में उनके प्रति श्रद्धा का फूल है, हमें भारत के चरणों में यह फूल प्रत्येक पल चढ़ाना है।
वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन ने कौम के सेवकों की तकदीर वंदे मातरम, हैं यहां इन बेकसो का तीर वंदे मातरम, कांपते थे अंग्रेज सुनकर जिस आवाज को, जब बोलती थी जैल में जंजीर वंदे मातरम,,, कविता की पंक्तियों के साथ वंदे मातरम के भाव को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा वंदे मातरम के उद्घोष और गीत को कॉंग्रेस ने क्यों नहीं गाया, भाजपा को क्या जरूरत पडी कि जो वंदे मातरम का नारा लगाकर राष्ट्र की चेतना को जगाने का काम कर रही हैं। बस इस अन्तर को समझे, भाजपा भारत माता की जय जयकार के लिए, राष्ट्र की चेतना के जागरण के लिए, मातृभूमि की सेवा के लिए, देश के स्वाभिमान के लिए कार्य कर रही है।
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा वंदे मातरम एक ग्रंथ है, यह गीत भारत की एकता के मूलमंत्र को धारण करके, आनंद मठ से निकलकर, साधु संतों के आंदोलन से उठकर जब पंजाब, हरियाणा से निकलकर जब यह जम्मू पहुंचा तब ये भारत की आत्मा बना। कॉंग्रेस के पहले अधिवेशन में इसे गाया तो गया लेकिन कॉंग्रेस की विभाजनकारी नीति के कारण उसके 2 पैराग्राफ हटा दिए गए, जिसमें माँ भारती की देवी दुर्गा स्वरुपों मानकर स्तुति की गई थी, उसे हटा दिया गया। उन्होंने कहा ये वह वंदे मातरम है जिसे गाते गाते असंख्य क्रांतिकारी बलिदान हो गए। इसे गाते गाते हंसते हंसते फाँसी के फंदे पर झूल गए। ये गीत भारत माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति से जोड़ने का काम कर करता हैं।
पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे वर्ष को वंदे मातरम के उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम गीत को गुनगुनाते हुए देश को स्वतंत्रता दिलाई। तुष्टीकरण की नीति के चलते कॉंग्रेस को इस भारत माँ की आराधना के गीत पर भी आपत्ति थी।
प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे और प्रदेश सहमीडिया प्रभारी दीपक जैन टीनू ने भी संबोधित किया।
राजवाड़ा पर हुए लघु भारत के दर्शन*
देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा के समक्ष राजवाड़ा पर विभिन्न समाज, सकल हिन्दू समाज, बोहरा समाज, मराठी, जैन, सिंधी समाज, सिक्ख, महाराष्ट्रियन, बिहारी, पूर्वोत्तर, असमिया, दक्षिण भारत, बंगाली समाज के नागरिक अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर सामुहिक वंदे मातरम का गान किया। ऐसा लग रहा था मानो राजवाड़ा पर लघु भारत उतर आया हो ।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता चंदुराव शिंदे, महामंत्री सुधीर कोल्हे, कैलाश पिपले, महेश कुकरेजा, हरप्रीत सिंह बक्शी, राकेश शर्मा, वासुदेव पाटीदार, अशोक अधिकारी, भूपेंद्र केसरी, भारत पारख, गौतम शर्मा, दीपेन्द्र सिंह सोलंकी, दीप्ति हाडा, कंचन गिदवानी, अजय शर्मा पप्पू, नेहा शर्मा, मंजू ठाकुर, इंदु श्रीवास्तव, गुलशन यादव, नारायण पालीवाल, स्वाति कशीद, सचिन बंसल, विशाल यादव, वरुण पाल, हेमराज वाडिया, गोविंद पंवार, आकाश गर्ग रानू , रितेश शर्मा, नितिन शर्मा, दीपांश खण्डेलवाल, राजा कोठारी, दीपेश पचोरी, सुखविंदर मन्नी भाटिया, सौरभ खण्डेलवाल सहित बड़ी संख्या में समाजों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता व आम नागरिक उपस्थित थे।
झलकियां
मंच पर भारत माता का चित्र लगाया गया था, जिसमें अखंड भारत को दर्शाया गया था।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ये देश है वीर जवानों का अलबेलो का मस्तानों का गाना गाया, जिस पर संचालन कर रहे हरप्रीत बक्शी और सिक्ख समाज के पदाधिकारियों ने भांगड़ा किया।
कैलाश जी गीत पर महापौर भार्गव और विधायक शुक्ला ने भी भांगड़ा किया।
प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना रागिनी मक्खर और उनकी टीम ने वंदे मातरम गीत पर तिरंगा वेशभूषा में शानदार कथक की प्रस्तुति दी ।
सुप्रसिद्ध गायिका आकांक्षा जाचक ने सम्पूर्ण वंदे मातरम की सुमधुर प्रस्तुति दी।
बालिकाएं भारत माता की वेशभूषा में सामुहिक वंदे मातरम के गान में शामिल हुई।
ये देश है वीर जवानों का गीत पर सिक्ख समाज के पदाधिकारियों ने मंच पर भांगड़ा नृत्य किया ।
मातृशक्ति, बहनों भी नृत्य कर देशभक्ति गीतों पर नृत्य किया। विधायक मालिनी गौड और उषा ठाकुर ने उनका उत्साहवर्धन किया ।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उपस्थित जनसमुदाय को स्वदेशी का संकल्प दिलाया।
राजवाड़ा क्षेत्र तिरंगे ध्वजों से सजा हुआ था।
