राम-कृष्ण का अवतरण सिर्फ भारत भूमि पर ही संभव, किसी अन्य
देश की इतनी पुण्याई और पवित्रता नहीं हो सकती : पं. भार्गव

इंदौर। जिसने भी स्वयं को श्रीराम से जोड़ा है, उसने हनुमान की तरह अदभुत काम किए हैं। राम का चरित्र काफी उदार है। राम के चरित्र में पुरुषार्थ, प्रेम, ममता, समता और एकता के सूत्र दिखाई देते हैं। राम के बिना इस सृष्टि और भारत भूमि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। राम और कृष्ण का अवतरण सिर्फ भारत भूमि पर ही हो सकता है क्योंकि दुनिया के अन्य किसी भी देश की इतनी पुण्याई और पवित्रता नहीं हो सकती। शिव श्रद्धा और पार्वती विश्वास है। श्रद्धा और विश्वास के बिना मनुष्य का जीवन सार्थक नहीं हो सकता।
बर्फानी धाम के पीछे स्थित गणेश नगर में माता केशरबाई रघुवंशी धर्मशाला परिसर के शिव-हनुमान मंदिर की साक्षी में चल रही रामकथा में शुक्रवार को प्रख्यात मानस मर्मज्ञ पं. मनोज भार्गव ने उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। ब्रह्मऋषि स्वामी बर्फानी दादा महाराज की प्रेरणा से हो रहे इस अनुष्ठान में 3 जनवरी को श्रीराम जन्म महोत्सव, 4 को श्रीराम सीता विवाह, 5 को श्रीराम वन गमन एवं केवट संवाद, 6 को भरत चरित्र, 7 को पंचवटी निवास, गिद्धराज एवं शबरी चरित्र, 8 को श्रीराम–सुग्रीव मित्रता, 9 को रावण वध एवं रामराज्याभिषेक प्रसंगों की संगीतमय कथा होगी। प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से तुलसीराम-सविता रघुवंशी एवं संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी, गुंजन गंगवाल, रजत शाक्य, पं. कुणाल शर्मा, ज्ञान प्रकाश यादव, बंटी सिंह ठाकुर आदि ने व्यास पीठ एवं रामचरितमानस का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी नरेन्द्र मिश्रा, रामचंद्र पाटीदार, रामसिंह राजपूत, मलखान सिंह कुशवाह, देवकरण यादव आदि ने की।
कथा में शंकर पार्वती विवाह सहित अनेक प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या की गई। संध्या को आरती में सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया। संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी ने बताया कि गणेश नगर में कथा 9 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से सांय 5 बजे तक होगी। नववर्ष के उपलक्ष्य में पिछले 25 वर्षों से यहां नियमित रूप से कथा सत्संग का आयोजन जारी है। कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए पंडाल, बैठक व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई, रोशनी, सुरक्षा एवं निशुल्क वाहन पार्किंग सहित समुचित प्रबंध किए गए हैं।
पं. भार्गव ने कहा कि राम इस देश की अस्मिता और गौरव के पर्याय हैं। इनके समूचे जीवन चरित्र में कहीं भी कोई दोष नहीं है। यह निर्दोषता ही उन्हें पूजनीय और वंदनीय बनाती है। राम का नाम इस देश की सनातनता और सार्वभौमिकता है। राम ही सत्य है राम ही सनातन है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के प्रसंगों में भी राम नाम ही सत्य होता है। वैष्णवजन वही है जो दूसरों की पीड़ा दूर करे। शिव और पार्वती का विवाह श्रद्धा और विश्वास के मिलन का प्रतीक है। जीवन में यदि श्रद्धा और विश्वास नहीं है तो वह जीवन पाशविक बन जाएगा।
