
आर्य रामलाल प्रजापति
महू। महू में प्रति 2 वर्ष में होने वाले गायत्री महायज्ञ का आयोजन होता है। इस वर्ष का 5 दिवसीय गायत्री महायज का समापन 4 जनवरी को यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य योगेन्द्र जी याज्ञिक ने यजमानो से आहुतियां डलवाकर निर्विध्न यज्ञ सम्पन्न कराया।
यज्ञ के यजमानो को यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने विधि विधान से पूर्णाहुति के समय यजमानो को बताया कि आपके शुभ कर्मो की सुगंधि सर्वत्र जाती है। आप इस पूर्णाहुति के बाद एक-एक संकल्प लेकर जाएं । संकल्प यह कि हम गुस्सा नहीं करेंगे। हम झूठ नहीं बोलेंगे । इन प्रकार के छोटे-छोटे व्रत लेने से ही जीवन में परिवर्तन आता है। प्रत्येक व्यक्ति को धर्म का आचरण करना चाहिए। व्यक्ति को अपने दैनिक कार्यों से 5 मिनट का समय निकालकर ईश्वर का स्मरण करते रहने से जीवन सत्कर्मों की ओर अग्रसर होता है। इसी से जीवन सफल होता है। रात्रि में नींद न आए तो अच्छी पुस्तकें पढ़ना चाहिए। सोने से पूर्व ईश्वर का धन्यवाद व उठते ही ईश्वर से शुभ कर्मों का आशीर्वाद लेना चाहिए।
मृत्यु परमेश्वर का वरदान है- डा.याज्ञिक
इसके पश्चात मुख्य मंच से आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने उपस्थित धर्म प्रेमी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा हमें मृत्यु से भय नहीं होना चाहिए। मृत्यु परमेश्वर का वरदान है। मरना तो सबको है, किंतु मरने- मरने में अंतर होता है। ईश्वर की उपासना करने वाले की मौत ऐसे नहीं, मौत को उसे नहीं वह मौत को ढूंढते हैं। अर्थात सत्कर्म को करने वाले का जीवन सफल ही नहीं सार्थक भी होता है । यह शरीर परमात्मा ने शुभ कर्मों के लिए ही दिया है। हम सबको सदा नहीं रहना है, इसलिए जिस समय हमारी कोई सुनने वाला नहीं हो, उस समय ईश्वर हमें अपने बच्चों को नया शरीर दे देते हैं।
आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि हमारे दुख का कारण हमारा राग- द्वेष है। हमें राग द्वेष से बचना चाहिए । हमें ईश्वर से अनुराग बढ़ाना चाहिए तभी हम बुराइयों से बचेंगे। हमें अपने अंतःकरण को पवित्र बनाकर ईश्वर की ओर लगाने से ही जीवन धन्य हो सकेगा। सभी का जीवन रचनात्मक कार्यों से ही सफल होगा।
जो लोग मरकर भी याद आते हैं उन्ही का जीवन, जीवन है ।व अमर हो जाते हैं। हम सदा -सदा इस संसार में रहें ऐसा कार्य करें। भगवान राम को 9 लाख 50 हजार साल बाद भी हम उनको याद करते हैं । 5500 वर्ष बाद भी श्री कृष्ण को याद करते हैं। यह उनके शुभ कर्मों का परिणाम है। शास्त्र कहते हैं- जो अपने लिए नहीं संसार के लिए जीता है ,ऐसे काम जो यश के लिए हो, तो संसार में अपना नाम अमर हो जाएगा। जीवन मरण से बचना का प्रयत्न करें । अर्थात मैंने बहुत अच्छे-अच्छे कर्म किए हैं । शरीर को जब हम अपना मानोगे तो परेशानी होगी, जब ईश्वर का दिया हुआ मनेघा तो कोई परेशानी नहीं होगी । शरीर भगवान से लिया, शुभ कर्म करते हुए जीना चाहिए। इसी से लंबी आयु प्राप्त होती।
धर्म हमारा मार्गदर्शन करता है
मंच से संचालन करते हुए संयोजक प्रकाश आर्य ने कहा धर्म हमारा मार्गदर्शन करता है । वह हमें रास्ता दिखाता है । समाज को जागरूक होना चाहिए। अपने अंत में गायत्री महायज्ञ समिति के सभी सदस्यों, सहयोगियों , गुरुकुल वाराणसी और गुरुकुल मोहन बड़ोदिया के आचार्याओं यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य योगेंद्र याज्ञिक, वेद कथा वाचक (वाराणसी) आचार्या प्रीति विमर्शिनी, और उनके गुरुकुल की कन्याएं ,मोहन बड़ोदिया की आचार्या श्रीमती रिचा जी व गुरुकुल की कन्याओ, भजनोपदेशको- बिजनौर से पधारे मोहित शास्त्री, दिल्ली से विनोद आर्य ,उत्तर प्रदेश के पधारी आचार्य सुलभा शास्त्री , कानड के पंडित काशीराम जी “अनल” , साथ ही कानड़, मोहन बड़ोदिया, उज्जैन, बड़नगर, इंदौर, भोपाल, झाबुआ आदि क्षेत्रों से पधारे सभी आर्य समाजों के पदाधिकारी,व कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त
