20 जनवरी तक मनेगा महोत्सव – 200 से अधिक मंचों से होगी पुष्प वर्षा
राम रामायण मंडल के वार्षिकोत्सव और बाबा की प्रतिमा के पाटोत्सव सहित होंगे विभिन्न अनुष्ठान – बनेगा नया कीर्तिमान


इंदौर
शहर के पश्चिम क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्र, पीलिया खाल एरोड्रम रोड स्थित दास हनुमान बगीची पर 11 से 20 जनवरी तक जय सियाराम बाबा की पावन स्मृति में चरण पादुका यात्रा, मूर्ति अवतरण महोत्सव, राम रामायण मंडल के वार्षिकोत्सव, विभिन्न रामायण एवं भजन मंडलों द्वारा सम्पूर्ण रात्रि भजनों की प्रस्तुति, सुंदर काण्ड पाठ, हवन एवं चलित प्रसाद वितरण सहित विभिन्न अनुष्ठान होंगे।
श्री दास हनुमान बगीची जय सियाराम बाबा स्मृति ट्रस्ट की ओर से कैलाश कुसुमाकर, वीरेन्द्र गुप्ता, अशोक पटेल एवं पं. देवेन्द्र पुजारी ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ रविवार 11 जनवरी को दोपहर 3 बजे दास बगीची से भव्य चरण पादुका यात्रा के साथ होगा, जिसमें करीब 200 स्वागत मंचों से पादुका पूजन, एक हजार से अधिक ब्राह्मणों और उज्जैन के महाकाल मंदिर की भस्म रमैया मंडली 101 ब्राह्मणों द्वारा शंख ध्वनि, शस्त्र कला में निपुण कन्याओं द्वारा प्रदर्शन, रंगारंग आतिशबाजी एवं समूचे यात्रा मार्ग में प्रसाद वितरण के साथ यात्रा के समापन पर दास बगीची में सभी भक्तों को अभिमंत्रित और हनुमानजी को समर्पित रक्षासूत्र के वितरण सहित विभिन्न अनुष्ठान होंगे। चरण पादुका यात्रा शहर के इतिहास में नया कीर्तिमान दर्ज कराने वाली होगी। यात्रा में शहर के 100 से अधिक धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों की भागीदारी रहेगी।
अनेक शहरों और कस्बों के भक्त आएँगे – तपोनिष्ठ संत सद्गुरु जय सियाराम बाबा की मुख्य तपोस्थली दास बगीची पर बाबा की चरण पादुका की दिव्य यात्रा रविवार 11 जनवरी को दोपहर 3 बजे दास बगीची से प्रारंभ होकर बड़ा गणपति, टोरी कार्नर, लोहारपट्टी, कैलाश मार्ग, अंतिम चौराहा, पंचकुईया, भूतेश्वर महादेव होते हुए पुनः दास बगीची पहुचेगी। जय सियाराम बाबा के भक्तों की संख्या हजारों में है जो नर्मदा तट स्थित महेश्वर, श्रीराम कुटी, अमरकंटक, हनुमान सदन राऊ, नारायण बाग गुरुकृपा मंदिर सहित मालवांचल के अनेक शहरों और कस्बों से आकर इस यात्रा में शामिल होंगे।
यात्रा में होंगे अनेक आकर्षण – यात्रा में सबसे आगे कड़ाबीन की तोप से फूलों की वर्षा, दो बैंड, हाथी, घोड़े और ऊंट, दो भजन मंडलियाँ, उज्जैन के महाकाल मंदिर के भक्तों की भस्म रमैया मंडली, हनुमत ढोल की 71 सदस्यीय टीम के साथ एक हजार वेदपाठी ब्राह्मण और 101 शंखधारी ब्राह्मण भी चलेंगे। रामजी एवं हनुमानजी के जीवन चरित्र पर केन्द्रित 4 झांकियां, शस्त्र कला का प्रदर्शन करती दुर्गावाहिनी एवं दो अखाड़ों से जुड़ी बालिकाओं के अलावा भजन एवं गरबा मंडलियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। प्रमुख चौराहों पर रंगारंग आतिशबाजी भी होगी।
सभी भक्तों को अभिमंत्रित रक्षासूत्र, महाभंडारा भी – यात्रा के समापन पर दास बगीची में सभी भक्तों को अभिमंत्रित एवं हनुमानजी को समर्पित रक्षासूत्र का वितरण भी किया जाएगा। यात्रा के समापन पर महाभंडारा भी होगा। पूरे यात्रा मार्ग की सफाई का प्रबंध भी हाथोंहाथ किया गया है। मार्ग में 200 से अधिक स्वागत मंचों से यात्रा पर पुष्प वर्षा कर भक्तों का स्वागत भी किया जाएगा। करीब ढाई किमी की दूरी तय करने वाली इस यात्रा में शहर के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु भागीदार बनेंगे।
13 को वार्षिकोत्सव, 14 से 20 तक पाटोत्सव – दास बगीची से जुड़े सत्यनारायण शर्मा, रामनिवास सांखला, मनोहर लिम्बोदिया, विमल पाणीगृही, भीमराज राठौर, हरिश्चंद्र यादव, दिलीप विजयवर्गीय ने बताया कि दास बगीची पश्चिम क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है जो लगभग 5 बीघा क्षेत्र में स्थापित है। यहाँ मनाए जा रहे इस महोत्सव में मंगलवार 13 जनवरी को राम रामायण मंडल का वार्षिकोत्सव भी मनाया जाएगा जिसमें सुबह 8 बजे से रामचरितमानस का अखंड रामायण पाठ प्रारंभ होगा। रात 8 बजे से विभिन्न रामायण एवं भजन मंडलों द्वारा पूरी रात भजनों की प्रस्तुतियों का अनुपम आयोजन होगा। बुधवार 14 जनवरी को दोपहर 2 बजे से 108 सुंदरकाण्ड पाठ द्वारा हवन एवं पूर्णाहुति के बाद महाआरती और चलित प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। श्री जय सियाराम बाबा की बगीची में स्थापित प्रतिमा का पाटोत्सव भी 14 से 20 जनवरी तक मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत मंगलवार 20 जनवरी को सुबह 9 बजे गुरुदेव स्थापना, दोपहर 2 बजे पूर्णाहुति के बाद महाश्रृंगार, आरती, प्रसाद वितरण एवं ब्राह्मण भोज के कार्यक्रम होंगे। रात 8.30 बजे से राम रामायण मंडल द्वारा भजन संध्या भी होगी। दास बगीची परिसर स्थित जय सियाराम बाबा संस्कृत विद्यापीठ पर गुरुकुल पद्धति से निशुल्क शिक्षण, बीमारी एवं गैर-दुधारू गायों की सेवा के लिए गौशाला, प्रत्येक शनिवार एवं मंगलवार को भक्तों के कष्टों को दूर करने हेतु जल, धागा और झाड़ा की परंपरा भी निशुल्क की जा रही है। इस बगीची पर पूरे वर्ष अनेक धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
