एयरपोर्ट रोड स्थित श्री श्रीविद्याधाम के प्रकाशोत्सव पर निकली भव्य शोभायात्रा, आज माँ करेंगी नर्मदा जल में नौका विहार

इंदौर। जगह-जगह पुष्प वर्षा और मां के जयघोष के बीच बैंड-बाजों, नगाड़ों और शहनाईयों की सुर लहरियों पर थिरकते श्रद्धालु… सुसज्जित रथ पर सवार स्वर्ण मुकुट एवं अन्य अभूषणों से अलंकृत मां पराम्बा ललिता महात्रिपुर सुंदरी…. श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत भक्तों में रथ को खींचने की होड़… एक स्वर्ण रथ पर आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी गिरिजानंद सरस्वती ‘भगवन’ का चित्र एवं पादुका… हाथों में गन्ने लिए मंगल कलशधारी महिलाएं… अश्वों पर सवार बालिकाओं के रूप में नौ देवियां और रथों पर विराजित देवी-देवताओं के श्रृंगार में नन्हे-मुन्ने बालक… वेद-वेदांग विद्यापीठ के 151 भूदेवों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार… सड़क के दोनों ओर मां के दर्शन के लिए आतुर भक्तों का सैलाब…
यह नजारा था विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम के 31वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में निकली भव्य शोभायात्रा का। आश्रम परिवार के पं. दिनेश शर्मा, राम एरन एवं राजेन्द्र महाजन ने बताया कि गुप्त नवरात्रि एवं आश्रम के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आश्रम परिसर से प्रारंभ इस शोभायात्रा में भक्तों, विशेषकर महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। वेदपाठी बटुकों ने तिरंगा लहराकर राष्ट्र आराधना के साथ यात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा के पूर्व आश्रम में दिनभर मां के मनोहारी श्रृंगार में आचार्य पं. लोकेश शर्मा सहित अनेक वेदपाठी विद्वान जुटे रहे। रथ की साज-सज्जा भी गजब की थी। पूरे यात्रा मार्ग में भक्तों के बीच रथ को खींचने की होड़ लगी रही। आश्रम से प्रारंभ यात्रा कालानी नगर चौराहा, सुखदेव नगर, 60 फीट रोड, कान्यकुब्ज नगर से एयरपोर्ट रोड होते हुए पुनः मंदिर पहुंची तो भक्तों के सैलाब ने मानों आश्रम परिसर को छोटा बना दिया। अंचल के अनेक संत और विद्वान भी इस उत्सव के साक्षी बने। भक्तों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा और स्वागत के कारण यात्रा को पुनः मंदिर पहुंचने में तीन घंटे से अधिक का समय लग गया। आश्रम परिवार के रमेशचंद्र राठोड, रमेश पसारी, संजय पंडित, चन्दन तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु पूरे समय रथ यात्रा की व्यवस्था बनाने में समर्पित बने रहे।
यात्रा के समापन पर आश्रम के 21 विद्वानों ने आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में मां भगवती को अर्घ्य देकर पूजन-अभिषेक के बाद 56 भोग समर्पित किए गए। महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में भगवती को सुसज्जित रथ से पुनः अपने स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया। संध्या को 108 दीपों से महाआरती में आश्रम परिसर में पैर रखने की भी जगह नहीं थी। सुगंधित फूलों की वर्षा से आश्रम एवं मंदिर परिसर देर रात तक महकता रहा।
आज शाम माँ करेगी नर्मदा जल में नौका विहार – रविवार 25 जनवरी को सुबह 9.30 बजे से पूज्य ‘भगवन’ के श्रीविग्रह एवं पादुका पूजन अभिषेक एवं आरती तथा शाम 6 बजे नर्मदा जयंती के उपलक्ष्य में नर्मदा के पवित्र जल में माँ का नयनाभिराम नौका विहार होगा। नौका विहार की जीवंत झांकी भी श्रृंगारित की जाएगी। महाअष्टमी सोमवार 26 जनवरी को शाम 6 बजे से माँ का भव्य पुष्प बंगला श्रृंगारित होगा जिसमें विराजित होकर माँ के दिव्य दर्शन होंगे। मंगलवार 27 जनवरी को शाम 6 बजे से दीपोत्सव एवं छप्पन भोग दर्शन का दिव्य आयोजन होगा। महोत्सव की तैयारियां पूरी हो गई हैं।
