सती और ध्रुव चरित्र की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

इंदौर। श्री रामेश्वर सोमेश्वर महादेव मंदिर समिति रामनगर द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो उठे। कथा व्यास महामंडलेश्वर 1008 स्वामी श्री शांति स्वरूपानंद गिरिजी महाराज के मुखारविंद से सती चरित्र और ध्रुव चरित्र के अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाए गए, जिन्हें सुनकर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
आयोजन के संयोजक गोपाल सिंह चौहान, यजमान मलखान सिंह कुशवाह, सहसंयोजक विजय दुबे व आकाश पटेल, अध्यक्ष अजय कुशवाह तथा उपाध्यक्ष दिलीप मौर्य ने दूसरे दिन कथा श्रवण के लिए पहुंचे सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कथा के मुख्य यजमान श्रीमती राधा मलखान सिंह कुशवाह थीं। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
महामंडलेश्वर स्वामी श्री शांति स्वरूपानंद जी ने प्रवचन गंगा प्रवाहित करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति और दृढ़ निश्चय ही मनुष्य को ईश्वर से मिला सकते हैं। माता सती के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब उनके पिता राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती यह अपमान सहन नहीं कर सकीं और योगाग्नि के माध्यम से अपने शरीर का त्याग कर दिया। यह प्रसंग त्याग, स्वाभिमान और धर्म की रक्षा का संदेश देता है।
इसके बाद बालक ध्रुव की कथा सुनाते हुए स्वामी जी ने बताया कि जब सौतेली माता के तिरस्कार से आहत होकर ध्रुव वन में चले गए, तब उन्होंने अटूट श्रद्धा और कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें ध्रुव तारा के रूप में अमर पद प्रदान किया। ध्रुव की निष्ठा, दृढ़ता और अटूट भक्ति की कथा ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
