वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता ने सोने को आसमान पर पहुंचाया तो त्योहारी सीजन में चांदी की औद्योगिक मांग ने चांदी के दाम में चार चांद लगा दिए। जैसे जैसे दोनों धातुओं के दाम बढ़ रहे हैं उनकी मांग भी बढ़ती जा रही है। यहां तक कि मांग और सप्लाय में अंतर की वजह से लोगों को बाजार से चांदी खरीदने के लिए प्रीमियम देना पड़ रहा है। जानिए सोने और चांदी की इस प्रतिस्पर्धा में कैसा होगा दोनों धातुओं का भविष्य?
MCX पर चांदी करीब 1,49,000 रुपए प्रति किलो है जबकि चांदी के दाम अलग अलग शहरों में अलग अलग हो सकते हैं। उत्तर भारत में अधिकांश शहरों में इसके दाम 1,56,000 रुपए के करीब है। इस पर 3 प्रतिशत जीएसटी भी लगता है।
बाजार में चांदी की मांग और सप्लाय में काफी अंतर है। इस वजह से कई स्थानों पर डिलिवरी में समस्या आ रही है। इसका फायदा उठाकर कुछ लोग इसे प्रीमियम पर बेच रहे हैं। वैसे तो चांदी में प्रीमियम आम है लेकिन मांग बढ़ने पर प्रीमियम और बढ़ जाता है। यह स्थिति त्योहारी सीजन में ज्यादा दिखाई देती है।
अमेरिका ने इसे क्रिटिकल मिनरल में शामिल किया तो इसके दाम में और इजाफा हुआ। इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड भी तेजी से बढ़ी है। चांदी में किसी भी धातु की तुलना में सबसे अधिक विद्युत चालकता, तापीय चालकता और परावर्तकता होती है, जिससे यह विभिन्न तकनीकों के लिए आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिक्स में सर्किट बोर्ड और विद्युत कनेक्शन से लेकर सौर ऊर्जा और चिकित्सा उपकरणों तक, चांदी के कई उपयोग आधुनिक उद्योगों में महत्वपूर्ण हैं।
सोलर पैनल से लेकर ईवी गाड़ियों में चांदी का इस्तेमाल हो रहा है। इस वजह त्योहारी सीजन में इसकी इंडस्ट्रीयल मांग काफी बढ़ी है। चांदी पर 6000 रुपए प्रीमियम चल रहा था। इसके अतिरिक्त ग्राहकों को 3 फीसदी जीएसटी भी चुकाना होता है।
अनिश्चितता की स्थिति में गोल्ड का फ्यूचर चांदी से ज्यादा ब्राइट है। सोने को सेफ हैवन कहा जाता है, यह दर्जा चांदी के पास नहीं है। युद्ध काल या अन्य विषम परिस्थितियों में जब औद्योगिक उत्पादन कम हो जाता है चांदी की मांग घट जाती है। इस वजह से इसके दाम भी गिर जाते हैं। गोल्ड में लोग निवेश के उद्देश्य से पैसा लगाना सेफ है ।
