अधिक मोबाइल और टीवी के उपयोग, तेज आवाज में
संगीत से भी मिर्गी का रोग बढ़ सकता है – डॉ. मेहता

इंदौर
सही जानकारी के अभाव में लोग मिर्गी को अक्सर ऊपरी बाधा, देवी प्रकोप या क्षुत की बीमारी मान लेते हैं जो पूरी तरह भ्रामक और गलत है। मिर्गी रोग के कई कारण हो सकते हैं लेकिन वर्तमान हालातों में अत्यधिक मोबाइल और टीवी के उपयोग, तेज आवाज में संगीत सुनने, अनियमित खानपान, नींद और खून की कमी जैसे कारण भी मिर्गी को बढ़ा सकते हैं। सही समय पर उचित इलाज, परामर्श और देखभाल से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
शहर की प्रख्यात बाल रोग एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रेणुका मेहता ने इंदौर एपिलेप्सी एसो. विशेषज्ञ समिति इंदौर चैप्टर के तत्वावधान में पर्पल डे के उपलक्ष्य में गीता भवन में आयोजित विशेष कार्यशाला में उक्त बातें बताई। इस अवसर पर एसो. की सचिव डॉ. वीवी नाडकर्णी ने कहा कि संगठन द्वारा प्रतिवर्ष एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान के तहत पर्पल डे मनाया जाता है जिसकी शुरुआत 2008 में कनाडा में नौवा स्कोटिया में केसेडी मेगन नामक लड़की ने 26 मार्च को की थी। इस दिन लोग बेंगनी रंग के कपडे पहनते हैं क्योंकि यह मिर्गी का प्रतीक रंग है। इससे लोगों का ध्यान मिर्गी की बीमारी की ओर जाता है और इसके बारे में बात करने और समझने में मदद मिलती है। एसो. के अध्यक्ष डॉ. बंसत डाकवाले, गीता भवन हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र भंडारी ने भी पर्पल डे पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष राम ऐरन ने चिकित्सकों के साथ दीप प्रज्वलन कर इस कार्यशाला का शुभारम्भ किया।
डॉ. रेणुका मेहता ने कहा कि बच्चों में 6 माह से 5 वर्ष की आयु के दौरान बुखार के समय दौरे (फेब्राइल सीजर) 2 से 7 प्रतिशत तक देखे जाते हैं। हालाँकि इनमें से केवल 2 से 5 प्रतिशत मामलों में ही यह आगे चलकर मिर्गी में बदलता है। अधिक बुखार होने पर दिमाग की विद्युत गतिविधि बढ़ सकती है जिससे झटके आने की सम्भावना रहती है। ऐसे में सही उपचार और देखभाल जरुरी है। अतिथियों ने पर्पल डे के उपलक्ष्य में केक कटिंग समारोह भी आयोजित किया। इस मौके पर डॉ. कुरेचिया ने मिर्गी के मरीजों का निशुल्क परीक्षण किया और नीलम रानाडे ने उन्हें दवाओं का वितरण किया। अंत में गीता भवन के डॉ. गजेन्द्र भंडारी ने आभार माना।
