जन्मोत्सव की आरती, श्रृंगार दर्शन, 56 भोग एवं अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन
इंदौर

एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर हनुमान प्राकट्य दिवस पर दो दिवसीय महोत्सव का समापन गुरुवार रात को सैकड़ों भक्तों को हंस पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्रीमहंत स्वामी रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर पवनदास महाराज के सान्निध्य में चिंताहरण पंचमुखी हनुमानजी की साक्षी में अभिमंत्रित रक्षा कवच के वितरण के साथ हुआ। इसके पूर्व गुरुवार को सुबह भगवान के जन्मोत्सव की आरती, श्रृंगार दर्शन, छप्पन भोग एवं बुधवार से चल रहे अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति संपन्न हुई।
मठ के महंत पं. अमितदास महाराज ने बताया कि सुबह 6 बजे से हनुमानजी का प्राकट्य महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान महाआरती एवं भव्य चोला दर्शन के कार्यक्रम हुए। पूर्णाहुति हवन सुबह 10 बजे से प्रारंभ हुआ। शाम 7 बजे श्रृंगार दर्शन एवं महाआरती के बाद 56 भोग समर्पित किए गए। संध्या को ही भक्तों को पंचमुखी हनुमानजी की साक्षी में अभिमंत्रित रक्षा कवच (ताबीज) का वितरण भी किया गया। सैकड़ों भक्तों ने कतारबद्ध होकर ये रक्षा कवच प्राप्त किए। बच्चों को बुरी दृष्टि, अन्य बीमारियों तथा प्रकोप से बचाने के लिए प्रतिवर्ष मठ द्वारा अभिमंत्रित रक्षा कवच का वितरण किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान पंचमुखी चिंताहरण हनुमानजी का मनोहारी श्रृंगार भी किया गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष ही पंचमुखी हनुमानजी को सवा 13 सौ ग्राम चांदी से अलंकृत किया गया है। इस चांदी से हनुमानजी की भुजाओं के साथ ही गरूड़जी को भी सर्पाकार मुकुट से श्रृंगारित किया गया है। इस तरह हनुमानजी का समूचा गर्भगृह करीब 25 किलो चांदी से दमक रहा है। गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी हनुमान प्राकट्य महोत्सव इसी गर्भगृह में धूमधाम से मनाया गया। समूचे मठ परिसर को आकर्षणक विद्युत एवं पुष्प सज्जा से श्रृंगारित किया गया था, जिसे निहारने के लिए शाम से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा था।
