
जब चारों ओर मूर्तियाँ तोड़कर वेदों को जलाया जा रहा था,
तब स्वामी रामचरण ने राम नाम को जन-जन तक पहुँचाया
इन्दौर
जब राजस्थान की भूमि पर चारों ओर से आक्रमण हो रहे थे, मंदिरों में प्रतिदिन मूर्तियाँ तोड़ी जा रही थीं, हमारे वेदों को जलाया जा रहा था और अज्ञान का बोलबाला था, तब उस युग में महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज ने अवतार लेकर राम नाम की निर्गुण धारा को जन जन तक पहुँचाने की चुनौती को स्वीकार किया था। उनका कृतित्व और व्यक्तित्व विलक्षण था कि आज 228 वें निर्वाण दिवस पर हम उन्हें पुष्पांजलि समर्पित कर उनका पूजन अर्चन कर रहे हैं।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के जगद्गुरु आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज के, जो उन्होंने छत्रीबाग रामद्वारा पर सम्प्रदाय के मूलाचार्य स्वामी रामचरण महाराज के 228 वें निर्वाण दिवस पर आयोजित धर्मसभा एवं अन्य कार्यक्रमों में व्यक्त किए। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने रामचरण महाराज के ग्रन्थ का सामूहिक गायन, पूजन एवं अर्चन कर भजन और महाआरती के बीच उनका पुण्य स्मरण किया। इस मौके पर संत श्री रामनारायण, संत हरसुखराम, संत मनोरथराम, संत ह्रदयराम, संत बोलताराम आदि ने महाप्रभु के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला और रामधुन, लावणी, जय जयवंती आदि का गायन करते हुए रामद्वारा की 132 वर्ष प्राचीन परम्परा के अनुरूप इस उत्सव को आत्मसात किया। छत्रीबाग रामद्वारा ट्रस्ट के लक्ष्मी कुमार मुछाल एवं रामसहाय विजयवर्गीय ने बताया कि इस अवसर पर छत्रीबाग रामद्वारा की ओर से देवेन्द्र कुमार मुछाल, राजेंद्र असावा, वासुदेव सोलंकी, सुनेर सिंह ठाकुर, भूरा पहलवान, हेमन्त काकानी एवं घनश्याम पोरवाल सहित अन्य श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु का गरिमापूर्ण स्वागत किया। प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ।
