आठवें फेरे में नशामुक्ति और हरियाली का लिया संकल्प सम्मेलन में शाही बारात और भव्य समारोह देखने को मिला

इंदौर। राजपूत समाज के सामूहिक विवाह समारोह ने सादगी, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा संदेश दिया। विवाह केवल एक रस्म नहीं रहा, बल्कि इसे संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति के संकल्प से जोड़ा गया। समारोह में नवविवाहित जोड़ों को रामायण भेंट कर उन्हें भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोडऩे का प्रयास किया गया। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं राजपूत समाज युवा चेतना मंडल इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में प्रथम नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह आखातीज पर स्काउट मैदान चिमन बाग में आयोजित किया गया, जिसमें पांच जोड़े परिणय बंधन में बंधे। संयोजक मुकेशसिंह गौतम, अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार, सचिव वीरेंद्र सिंह चौहान पप्पू ठाकुर, उपाध्यक्ष सुनील सिंह उमठ ने बताया कि विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुए विवाह में पारंपरिक सात फेरों के साथ एक विशेष आठवां फेरा भी रखा गया। इस फेरे में नवदंपत्तियों को नशामुक्त जीवन जीने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। आयोजन में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रही, जिससे समाज को सकारात्मक संदेश मिला। संयोजक श्री मुकेशसिंह गौतम, अध्यक्ष श्री सुनील सिंह परिहार, सचिव श्री वीरेंद्र सिंह चौहान पप्पू ठाकुर, उपाध्यक्ष श्री सुनील सिकरवार, एड सुनील सिंह उमठ ने बताया कि प्रत्येक पक्ष के 50-50 व्यक्तियों का निशुल्क भोजन रखा गया है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हर नवविवाहित जोड़े को प्रतिवर्ष दो नीम के पौधे लगाने का संकल्प दिलाया गया।
नव दंपत्ति को श्रीमद रामायण ओर नीम के पौधे भेट
संरक्षक श्री विजय सिंह परिहार, श्री सुरेश सिंह भदोरिया, श्री मोहन सिंह सेंगर, दीपक राजपूत , राजू भदौरिया , मुकेश सिंह गौतम , सुनील सिंह परिहार, एड सुनील सिंह उमठ ने नव युगल दंपत्ति को श्रीमद रामायण , ओर पर्यावरण रक्षार्थ नीम के पौधे अतिथियों ने भेट किए । प्रतिवर्ष विवाह वर्षगांठ पर पौधारोपण का संकल्प भी लिया ।
इनका रहा योगदान
पूरे आयोजन को सफल बनाने में
श्री राजेंद्र सिंह सोलंकी श्री सुनील सिंह परिहार, श्री मुकेश सिंह गौतम, श्री सुनील सिंह उमठ ,श्री मनोहर सिंह चौहान, श्री सुनील सिंह सिकरवार, श्री यशवंत सिंह भाटी, श्री नारायण देवड़ा, श्री विजय सिंह पंवार ,श्री सुमेर सिंह राठौर आदि का सराहनीय योगदान रहा।
सादगी और संस्कार पर जोर
समारोह का मुख्य उद्देश्य शादी-ब्याह में होने वाले फिजूलखर्च और दिखावे को कम करना रहा। सामूहिक विवाह के माध्यम से समाज ने यह संदेश दिया कि बिना कर्ज और आडंबर के भी खुशहाल जीवन की शुरुआत की जा सकती है।
