भागवत से अपनापन लेकर आज के युग में परिवार, समाज, राष्ट्र और
धर्म तथा संस्कृति को समृद्ध बनाने की जरूरत – पं. प्रभुजी नागर


इंदौर, । आज हमारे समाज में संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। पहले लोगों के मन में करुणा होती थी, फिर करुणा की जगह प्रेम ने ले ली और यह प्रेम भी धीरे-धीरे कम होकर मोह में बदल गया। अब तो मोह भी असली नहीं रहा, हर जगह मिलावट और नकलीपन दिख रहा है। स्मशान घाट में भी लोग राम-नाम-सत्य की जगह मोबाइल पर हैलो-हैलो बोल रहे हैं। स्वार्थ ने हमको अँधा बना दिया है। सोना तो सोना, अब पीतल भी नकली हो गया है। हम सब तांगे में जुते उस घोड़े की तरह दौड़ रहे हैं, जिसे उसकी दोनों आँखों पर बंधी पट्टियों के कारण केवल सीधा-सपाट रास्ता ही दिखता है। हम भी उस घोड़े की तरह स्वार्थ की दौड़ में जुते हुए हैं। समाज और परिवार को आज अपनापन चाहिए। भागवत में अपनापन के अनेक संदेश मौजूद हैं, इन्हें ग्रहण कर परिवार, समाज, राष्ट्र के साथ धर्म और संस्कृति को भी समृद्ध बनाने की जरूरत है। हमारा युवा सम्पत्ति की तरह बुजुर्गों से मिली सीख और सलाह को भी धरोहर की तरह संभालकर रखे तो समाज और धर्म के साथ राष्ट्र का भी बहुत कुछ कल्याण हो सकता है। भागवत कथा उस अमृत कुंभ के समान है जिसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थ समाहित हैं।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं मालव माटी के सपूत, माँ सरस्वती के वरद पुत्र संत कमलकिशोर नागर के सुपुत्र तथा प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ संत प्रभुजी नागर के, जो उन्होंने रविवार को अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान चौथे दिन उपस्थित विशाल जन सैलाब को आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। इंदौर अन्नपूर्णा मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि, स्वामी जयेंद्रानंद गिरि, ओंकारेश्वर अन्नपूर्णा मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद गिरि, पंचकुइया राम मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी रामगोपाल दास, ओखलेश्वर हनुमान मंदिर के पं. सुभाष पुरोहित, स्वामी वरदानंद महाराज एवं उत्तरकाशी से आए स्वामी रमानंद सहित अनेक संतों की अगवानी कथा के मुख्य आयोजन सुरेश अग्रवाल, पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, रामबाबू अग्रवाल, श्यामबाबू, अनिल गुप्ता, मनोज गुप्ता (शिवपुरी), अनिल सुरेखा (अकोला), राजेश अग्रवाल (दाहोद), विनोद अग्रवाल (भीकनगांव), ओमप्रकाश बंसल पंप, अनूप अग्रवाल, दिनेश बंसल पंप, हेमंत गर्ग आदि ने की। कथा में रविवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया गया। जैसे ही नन्हे कृष्ण को सुसज्जित टोकरी में लेकर वसुदेव और देवकी मंच पर पहुंचे, समूचा पंडाल भगवान के जयघोष से गूंज उठा। मनोहारी भजनों पर हजारों श्रद्धालु थिरक उठे। नन्हे कृष्ण की अगवानी आयुष पोद्दार, श्रीमती कृतिका अग्रवाल और यजमान सुरेश-अनिता अग्रवाल ने की।
गौशाला के लिए 11 लाख रुपए दान – अन्नपूर्णा परिसर में चल रही पं. प्रभुजी नागर की कथा में रविवार को गुजरात, दाहोद से आए समाजसेवी राजेश कुमार शांतिलाल अग्रवाल ने हाटकेश्वर धाम गौशाला के लिए 11 लाख रुपए का दान देने का संकल्प व्यक्त किया। इसपर पं. प्रभुजी नागर ने तत्काल यह कहते हुए उक्त राशि इंदौर के अन्नपूर्णा आश्रम की गौशाला को देने की घोषणा की कि यहाँ भी गौशाला में गौमाताएं हैं, उनकी सेवा के लिए यह धनराशि उपयोग में लाई जाए।
भागवत कथा में अपनी मालवी और हिंदी शैली में पं. नागर ने कहा कि हम चाहे जितने सीसीटीवी कैमरे लगा लें लेकिन सबसे बड़ी तो भगवान की ऑंखें हैं। भगवान की दृष्टि के आगे कुछ नहीं छुप सकता। घर में दीपक प्रज्वलित करने पर हमें उसका पूरा ध्यान रखना पड़ता है जबकि बद्रीनाथ में तो कपाट बंद होने के बाद भी 6 माह तक दीपक प्रज्वलित रहता है। यह भी भगवान की ही कृपा है। पं. नागर ने देवी अहिल्या को नमन करते हुए उनके सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके काम केवल मालवा-निमाड़ तक सीमित नहीं थे, उन्होंने तो काशी-विश्वनाथ में भी अनेक ऐसे पुनीत कार्य सेवा कार्य कराए हैं कि उनकी महिमा पर पूरा ग्रन्थ भी लिखा गया था लेकिन कहते हैं कि माता अहिल्या ने उसे बिना देखे ही नर्मदा में प्रवाहित-समाहित कर दिया था। महान व्यक्ति अपनी प्रशंसा के खिलाफ रहते हैं। प्रशंसा से व्यक्ति अपने कर्तव्यों से विमुख हो सकता है। कर्म अच्छे हैं तो भाग्य प्रबल होगा लेकिन अपने मन, वचन और कर्म से व्यक्ति अपने भाग्य और दुर्भाग्य का निर्माता स्वयं होता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने घर पलंग पर 8 घंटे सोता है तो उसे लगता है कि यही स्वर्ग है लेकिन जब उसी पलंग पर डॉ. की सलाह से उसे बेड रेस्ट पर रहने को कहा जाता है तो वही पलंग नर्क बन जाता है। पहले मेहमान आते थे तो खमा घणी बोलकर उनका स्वागत-सत्कार करते थे, बधाई गीत गाते थे, व्यंजन बनाते थे। लेकिन अब मन ही मन सोचते हैं कि ये जाएँगे कब। हमारे रिश्ते स्वार्थी होते जा रहे हैं। अब करुणा नहीं, लोगों की आँखों में आंसू भी सूख चुके हैं।
रविवार को भक्तों की संख्या इतनी बढ़ गई कि पंडाल का विस्तार करना पड़ा। 40 हजार वर्गफीट में बने पंडाल को बढाकर 60 हजार वर्गफीट में करना पड़ा। कथा आयोजक सुरेश अग्रवाल ने बताया कि अधिक संख्या में श्रद्धालु आएँगे तो पंडाल का और भी विस्तार करने की व्यवस्था की हुई है। भक्तों की सुविधा के लिए कथा स्थल पर बैठक व्यवस्था, मेगा स्क्रीन, साफ़सफाई, रोशनी, पेय जल, वाहनों के निःशुल्क पार्किंग, गोसेवा सहित समुचित प्रबंध किए गए हैं।
