करवा चौथ भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख व्रत है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए दिन भर उपवास करती हैं। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि शाम को चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं छन्नी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन इसके पीछे क्या कारण हैं? आज इस आलेख में हम आपको करवा चौथ पर छन्नी से पति का चेहरा देखने की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के बारे मान्यता है कि छलनी में हजारों छेद होते हैं, जिससे चांद के दर्शन करने से छेदों की संख्या जितनी प्रतिबिंब दिखते हैं। अब छलनी से पति को देखते हैं तो पति की आयु भी उतनी ही गुना बढ़ जाती है। इसलिए करवा चौथ का व्रत करने के बाद चांद को देखने और पति को देखने के लिए छलनी प्रयोग की जाती है इसके बिना करवा चौथ अधूरा है।
पुराणों में उल्लेख है कि करवा चौथ का व्रत पुराणों में करक चतुर्थी के नाम से प्रचलित है। करवा चतुर्थी के दिन माताएं निराहार रहकर के अन्न और जल का त्याग करके पति की लंबी आयु की कामना के लिए इस व्रत को करती हैं। पुराणों में ऐसी कथा है प्रजापति दक्ष ने जब चंद्रमा को श्राप दिया कि जो तुम क्षीण हो जाओ। जो तुम्हारे दर्शन करेगा उस पर कलंक आएगा। तब चंद्रमा रोते हुए शंकर भगवान के पास पहुंचे। बोले हमारा तो कोई चतुर्थी के दिन दर्शन ही नहीं करेगा। तब शंकर भगवान ने कहा था सब चतुर्थी को छोड़िए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की जो चतुर्थी आएगी उस दिन जो भी तुम्हारे दर्शन करेगा। उसके जीवन के जो सारे दोष, कलंक सब मिट जाएंगे।
करवा चौथ को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक का जिक्र हम करेंगे। करवा नाम की एक महिला थी, जो भद्रा नदी के पास रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में नहा रहा था, उस दौरान एक मगरमच्छ ने उसके पति को नदी के अंदर खींच लिया। उस भयानक क्षण में, करवा ने अपने पति की सुरक्षा के लिए मृत्यु के देवता यमराज से बहुत प्रार्थना की।
