गाँधी हॉल में चल रहे मनी मेला 09 में उमड़ा दर्शकों और ग्राहकों का मेला – व्याख्यान में आई दिलचस्प जानकारियां – आज सांसद लालवानी करेंगे समापन

इंदौर, गांधी हॉल पर चल रहे मनी मेला -09 में शनिवार को भी 25 हजार से अधिक दर्शकों ने पहुंचकर भारत सहित दुनिया के प्राचीन सिक्कों, मुद्राओं, डाक टिकटों, खनिज पदार्थों एवं अनेक ऐसी वस्तुओं का अवलोकन किया, जिनके बारे में अब तक केवल सुना ही था। इस मौके पर आयोजित व्याख्यान में 34 बार लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित गिरीश शर्मा आदित्य, मेजर डॉ. महेश गुप्ता, प्रख्यात डिजिटल क्रिएटर राज ज्ञानी, राजगढ़ से आए राज परिवार के ठा. शैलराज सिंह एवं विपिन भार्गव ने दर्शकों को भारतीय मुद्रा जगत के बारे में अनेक दिलचस्प जानकारियां देते हुए बताया कि दुनिया का सबसे बड़ा सिक्का 12 किलो वजन का था और ऐसा माना जाता है कि कालांतर में 12 किलो स्वर्ण मुद्रा देखकर किसी राजा ने वह मुद्रा हड़प ली। इसी तरह सबसे छोटा सिक्का भी “माशा” अर्थात मक्खी के आकार का था और वह भी भारत का ही रहा है। व्याख्यान में सोशल मीडिया पर आए दिन संग्राहकों को गुमराह करने वाले दिए जाने वाले प्रलोभन और आमंत्रण को लेकर भी वक्ताओं ने भी अनेक तथ्यात्मक जानकारियां प्रदान की। मनी मेला में शनिवार को दोपहर में देशभर से आए मुद्रा प्रेमियों और संग्राहकों ने पुराने सिक्कों, करेंसी नोटों और दुर्लभ वस्तुओं की नीलामी में भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। अतिथियों का स्वागत मुन्ना भार्गव, रवीन्द्र नारायण पहलवान, उमेश नीमा आदि ने किया।
इंदौर मुद्रा शोध न्यास की मेजबानी में शहर में यह 9 वां मुद्रा महोत्सव बनाम मनी मेला आयोजित किया गया है। तीन दिवसीय इस मेले में शुक्रवार को अमेरिका से आए मुख्य अतिथि और भारत के गुप्तकाल “स्वर्ण युग के सिक्कों” के लेखक एवं संग्राहक संजीव कुमार शिवली कुमार गुप्त ने दर्शकों को अनेक रोचक जानकारियां प्रदान की और बताया कि ईसा पूर्व 180 वर्ष पूर्व इंडो-ग्रीक राजा अगाथोक्ल्स ऑफ़ बैक्ट्रिया ने ताम्बे के कृष्ण-बलराम युग के सिक्के प्रचलित किए थे। दुनिया में अब ऐसे एक दो सिक्के ही बचे हैं जिनमें से एक संजय गुप्त के पास है जो उन्होंने शुक्रवार को इंदौर में चल रहे मनी मेले में प्रदर्शित किया। इस सिक्के में एक ओर ग्रीक भाषा में बड़े भाई बलराम समरक्षणा तथा दूसरी ओर वासुदेव कृष्ण लिखा हुआ है। इन दोनों पहलुओं पर एक ओर तो बलराम का पहलवानी वाला चित्र बनाया हुआ है तो दूसरी ओर भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र को भी दिखाया गया है। यह दुर्लभ सिक्का मुद्रा संग्राहकों के लिए सबसे अनमोल माना जाता है। शनिवार को आयोजित व्याख्यान में जब वक्ताओं ने भारतीय मुद्राओं की विशेषताओं का उल्लेख किया तो उस दौरान मौजूद डिजिटल क्रिएटर राज ज्ञानी ने भी सोशल मीडिया पर आए दिन संग्राहकों को गुमराह करने वाले दिए जा रहे आमंत्रणों और प्रलोभनों को अनैतिक बताते हुए कहा कि ऐसे लोग केवल अपनी दर्शक संख्या बढाने के लिए भ्रामक प्रचार करते हैं। अनेक इस तरह के भ्रामक विज्ञापन भी देखने, पढने और सुनने को मिलते हैं जिनमें लोगों को कहा जाता है कि आपके फलां वर्ष के या फलां काल के सिक्के के बदले में आपको इतने हजार या इतने लाख रुपए मिलेंगे, ऐसा कुछ नहीं है। अनेक स्कूली बच्चों और विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने भी गाँधी हॉल आकर मनी मेला का अवलोकन किया।
इंदौर मुद्रा शोध न्यास की मेजबानी में दोपहर में गाँधी हॉल पर आयोजित ऑक्शन में दुनिया और देशभर के अनेक मुद्रा संग्राहकों ने अनेक संग्रह बोली लगाकर ख़रीदे। शासन की अनुमति प्राप्त मेले में इंदौर के मुद्रा संग्राहक विराज भार्गव ने शासकीय अनुमति प्राप्त अपने ऑक्शन के माध्यम से देश के अनमोल और दुर्लभ सिक्कों की नीलामी भी की जिसमें अनेक लोग ऑनलाइन भी आए तथा करीब 15 खरीददारों ने स्वयं उपस्थित होकर बोली लगाकर विराज ऑक्शन के पास उपलब्ध छठीं शताब्दी के गांधार महाजनपद, 350 वर्ष पूर्व कुरु महाजनपद, मगध कालीन, शाक्य कालीन, ईरान और विदिशा काल, मोर्य काल के ताम्बे एवं अन्य धातुओं के दुर्लभ सिक्कों सहित मुग़ल शासन काल में अकबर, हुमायूँ, जहाँगीर, मालवा सल्तनत, खानदेश, चित्र दुर्गा, मलाबार, बाजबहादुर, गुप्त शासनकाल, चन्द्रगुप्त द्वितीय से लेकर मालवा की ग्वालियर, देवास, धार, भोपाल, इंदौर (तुकोजीराव द्वितीय, शिवाजीराव एवं अहिल्या बाई होलकर के समय की मुद्राएँ), झाबुआ, जयपुर, मैसूर, रतलाम, त्रावणकोर और बरमा (म्यांमार), तिब्बत, पुर्तगीज, ग्रेट ब्रिटेन, विक्टोरिया, मोम्बासा, जार्ज पंचम और अंग्रेजों से लेकर वर्तमान समय तक रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए विभिन्न करेंसी नोट भी इस ऑक्शन में खरीदे। अनेक तरह के नोटों की गड्डियां भी यहाँ नीलामी में खरीदी गई। सबसे ज्यादा आकर्षण 001 एवं 786 नंबर के नोटों के प्रति देखा गया। पांच-पांच सौ के उन नोटों को भी ग्राहकों ने मुंह मांगे दामों पर ख़रीदा जिनके नंबर 111, 222 से लगाकर 999 नंबर तक थे। शहर के अनेक विशिष्ठजनों ने भी मेले का अवलोकन कर मुद्राओं सम्बन्धी जानकारी प्राप्त की। दर्शकों की मौजूदगी का आलम यह रहा कि के बार सुरक्षा जवानों को दर्शकों को प्रवेश द्वार पर रोकना पड़ा। यह स्थिति शाम 7 बजे तक लगातार बनी रही।
आज समापन – मेला संयोजक विराज भार्गव ने बताया कि तीन दिवसीय मनी मेला 09 का समापन सांसद शंकर लालवानी के मुख्य आतिथ्य में अपराह्न 4 बजे होगा लेकिन मेला आम दर्शकों के लिए शाम 7 बजे तक निशुल्क खुला रहेगा।
