चाइनीज माँझे की वजह से हो रहे हादसों को लेकर मप्र उच्च न्यायलय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए याचिका दायर की और वरिष्ठ अभिभाषक को न्याय मित्र नियुक्त किया है । जिसकी सुनवाई गुरुवार को करते हुए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बीके द्विवेदी की युगलपीठ ने अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले इंदौर, देवास, उज्जैन, रतलाम, नीमच, मंदसौर, आगर मालवा, शाजापुर, राजगढ़, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी सहित 14 जिलों में चाइनीज मांझे का निर्माण, उपयोग, विक्रय, संग्रहण, भंडारण आदि प्रतिबंधित लगा दिया है । न्यायलय ने कहा है की सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, एसपी इस आदेश के पालन मे सुनिश्चित करें कि कार्यवाही सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि मैदान में भी नजर आए। मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।
कोर्ट ने शासन, पुलिस कमिश्नर से कहा था कि वे बताएं कि चाइनीज मांझे पर रोक लगाने के लिए उन्होंने क्या किया और इसके विक्रय पर सख्ती से कार्यवाही क्यों नहीं हो पा रही है । गुरुवार को हुई सुनवाई में शासन की ओर से उप महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए है साथ ही चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ लगातार कार्यवाही चल रही है। इस पर न्यायमित्र ने कहा कि मकर संक्रांति के त्योहार पर बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होती है, इसलिए इस मामले में सख्ती जरूरी है। कोर्ट ने उनके सुझावों को सुनने के बाद चाइनीज मांझे के निर्माण, उपयोग, विक्रय, संग्रहण, भंडारण को पूरी तरह से प्रतिबंधित करते हुए इंदौर खंडपीठ के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, एसपी से कहा कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें।
