महाकाल मंदिर में इस बार दीपपर्व की शुरुआत शनि प्रदोष के संयोग में आई धनत्रयोदशी से हो रहा है। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने से शनि प्रदोष का संयोग बनता है। महाकालेश्वर मंदिर की पूजन परंपरा में शनि प्रदोष का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान महाकाल उपवास रखते हैं तथा शाम को 4 बजे विशेष मंत्र व पाठ से उनका अभिषेक पूजन किया जाता है।
महाकाल मंदिर में 18 अक्टूबर को शनि प्रदोष के संयोग में आ रही धन त्रयोदशी से दीपपर्व का शुभारंभ होगा। पुजारी, पुरोहित राष्ट्र में सुख,समृद्धि व आरोग्यता की कामना से महाकाल की महापूजा करेंगे। 20 अक्टूबर को दीपावली मनाई जाएगी। 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा होगी। दीपपर्व पर राजा का आंगन रंगोली से सजेगा। आकर्षक विद्युत व पुष्प सज्जा की जाएगी।
धनत्रयोदशी पर पुरोहित समिति द्वारा भगवान महाकाल की महापूजा की जाएगी। राष्ट्र में सुख,समृद्धि के लिए भगवान को चांदी का सिक्का अर्पित कर पूजा अर्चना की जाएगी। मान्यता है भगवान महाकाल की इस प्रकार पूजा अर्चना करने से राष्ट्र में धन धान्य व सुख समृद्धि बनी रहती है। महाकाल की महापूजा के बाद मंदिर समिति द्वारा चिकित्सा इकाई में आरोग्यता के लिए भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाएगा।
