भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार इंदौर जिले में परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत दो नवीन गर्भनिरोधक साधनों इंप्लांट तथा अंतरा एस सी को प्रारंभ किया गया। इन्दौर जिले में नवीन गर्भनिरोधक साधनों इम्प्लान्ट एवं अंतरा एस.सी. के उपयोग हेतु अभिमुखीकरण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन,मध्यप्रदेश एवं जिला स्वास्थ्य समिति इन्दौर द्वारा यूएनएफपीए के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में इन्दौर शहरी क्षेत्र के ब्लॉक अधिकारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया था।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों को नवीन गर्भनिरोधक साधनों की सेवा प्रदान प्रक्रिया से परिचित कराना तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा। इम्प्लांट एक छोटा, लचीला रॉड होता है, केवल 4 से.मी. (डेढ़ इंच) लंबा, जिसमें प्रोजेस्टिन हार्मोन होता है। यह हार्मोन महिलाओं के शरीर में पाए जाने वाले प्राकृतिक हार्मोन जैसा होता है।
इसे प्रशिक्षित प्रदाता द्वारा ऊपरी बांह के भीतरी हिस्से की त्वचा के नीचे लगाया जाता है और यह महिला को 3 साल तक गर्भधारण से सुरक्षित रखता है।
महिला जब चाहे, प्रदाता से इसे निकलवा सकती है और तुरंत गर्भधारण कर सकती है। यह बहुत सुविधाजनक तरीका है क्योंकि एक बार लगवाने के बाद महिला को कुछ और करने की आवश्यकता नहीं होती। यह सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी गर्भनिरोधक विधि है। यह न तो स्तन के दूध को प्रभावित करता है और न ही नवजात शिशु को, इसलिए प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इसे सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकती हैं।
प्रशिक्षण के उपरांत इंदौर जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में इसका क्रियान्वयन प्रारंभ किया जा चुका है। इसी क्रम में शासकीय प्रकाश चंद सेठी सिविल अस्पताल में डॉ. सारा खान और नर्सिंग स्टाफ की टीम ने प्रथम इंप्लांट गर्भनिरोधक हितग्राही को लगाकर स्वास्थ्य सेवा की क्षेत्र में एक और सफलता प्राप्त की, यह परिवार कल्याण की राह को और आसान बनाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने इस उपलब्धि पर अस्पताल प्रबंधक चिकित्सा अधिकारी और नर्सिंग टीम को बधाई। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा के मार्गदर्शन में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग स्वास्थ्य सुविधाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु सतत प्रयत्नशील है।
