सत्य की विजय, धर्म की पुनः प्रतिष्ठा का प्रतीक
देपालपुर
भारत भूमि ने एक बार फिर उस सच्चे सनातनी संन्यासी का साक्षात्कार किया, जिसने असत्य और अन्याय के बीच भी “सत्य” के मार्ग को नहीं छोड़ा। मालेगांव ब्लास्ट केस के ऐतिहासिक निर्णय के बाद पहली बार देपालपुर पधारे स्वामी असीमानंद जी का नगर में भावनात्मक एवं श्रद्धाभाव से स्वागत हुआ।
समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव जैसे मामलों में जिन पर वर्षों तक “हिंदू आतंकवाद” का कलंक लगाने का षड्यंत्र रचा गया वही स्वामी असीमानंद जी आज न्यायालय से पूर्णतया निर्दोष सिद्ध होकर देश और धर्म के प्रति अपने निष्ठाभाव का उदाहरण बन गए हैं। देपालपुर आगमन पर सैकड़ों धर्मप्रेमी कार्यकर्ता उनके दर्शन हेतु एकत्रित हुए। नगर के प्रमुख हिंदूवादी कार्यकर्ता हितेश पाठक, देवेंद्र माली, राहुल पांचाल, भरत गौड़, काशी जी, जस्सू चौधरी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने जयघोष और पुष्प वर्षा से स्वामी जी का भव्य स्वागत किया। स्वामी जी ने अपने उद्बोधन में कहा“सच्चे राष्ट्रभक्त को झूठे आरोपों से दबाया जा सकता है, पर हराया नहीं जा सकता। जब धर्म के लिए, मातृभूमि के लिए कार्य किया जाता है, तो परमात्मा स्वयं न्याय दिलाता है।”
स्वामी असीमानंद जी, जिनका मूल नाम नवकुमार सरकार है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे हैं। उन्होंने वर्षों तक वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से आदिवासी समाज में सेवा का दीप जलाया। एक लाख से अधिक भाइयों की “घरवापसी” का अभियान और शबरी कुंभ का आयोजन, उनके तप और समर्पण की गाथा सुनाता है।झूठे आरोपों और यातनाओं के बावजूद स्वामी जी ने कभी भी अपनी निष्ठा से समझौता नहीं किया। आज उनका देपालपुर आगमन केवल एक व्यक्ति का आगमन नहीं, बल्कि उस विचार का पुनर्जागरण है जो कहता है“धर्म की राह कठिन है, पर अंततः विजय सत्य की ही होती है।”इस अवसर पर संघ के पूर्व प्रचारक देवेंद्र जी गुप्ता भी स्वामी जी के साथ उपस्थित रहे। दोनों ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से भेंट कर उन्हें देश और समाज के प्रति निस्वार्थ भाव से सेवा करने की प्रेरणा दी। देपालपुर की भूमि ने इस दिन न केवल एक संत का स्वागत किया, बल्कि सत्य, त्याग और तपस्या की उस परंपरा का पुनर्स्मरण भी किया, जिसे स्वामी असीमानंद जैसे त्यागी महापुरुष अपने जीवन से जीवंत करते हैं।
