संतों की समाधि के दर्शन कर बोले – समाज में नैतिक मूल्यों की प्राण प्रतिष्ठा संत ही करते हैं

इंदौर, 28 अक्टूबर। संत और तपस्वी महापुरुष जीवनभर अपनी साधना और तपस्या के बाद जो अनुभूति करते हैं, उसका उपयोग वे भक्तों और समाज की भलाई में करते हैं। संत समाज का मार्गदर्शन कर लोकहित में धर्म के माध्यम से समाज में नौतिक मूल्यों की प्राण प्रतिष्ठा करने के माध्यम बनते हैं।
ये दिव्य विचार हैं राम अग्र पीठ एवं मलूक पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु देवाचार्य राजेंद्र दास महाराज के, जो उन्होंने छत्रीबाग रामद्वारा पहुंचकर वहां प्राचीन संतों की साधना स्थली एवं उनकी समाधि के दर्शन करने के बाद उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए। रामद्वारा ट्रस्ट की ओर से लक्ष्मी कुमार मुछाल एवं रामसहाय विजयवर्गीय ने जगद्गुरु को रामद्वारा ट्रस्ट की गतिविधियों और रामद्वारा से जुड़े संतों के त्याग एवं जीवन साधना का विवरण दिया। इस अवसर पर उनकी अगवानी संत सुखराम महाराज बाड़मेर एवं दिव्येशराम धलपट वालों ने की। रामद्वारा भक्त मंडल की ओर से देवेन्द्र कुमार मुछाल, राजेंद्र असावा, वासुदेव सोलंकी, सुनेर सिंह ठाकुर, भूरा पहलवान, हेमन्त काकानी एवं घनश्याम पोरवाल ने जगद्गुरु का गरिमापूर्ण स्वागत किया।
