इंदौर के संस्थापक राव राजा राव नंदलाल मंडलोई के बलिदान दिवस पर 3 नव
को छत्रियों का पूजन कर भेंट की जाएगी शहीद परिवारों के लिए सहायता राशि
इंदौर के संस्थापक राव राजा राव नंदलाल मंडलोई
इंदौर, शहर के संस्थापक एवं आधुनिक बनती जा रही स्मार्ट सिटी के जनक, इंदौर के प्रथम शासक राव राजा रावनंदलाल मंडलोई की 294वीं पुण्यतिथि सोमवार 3 नवंबर को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इस दौरान सुबह 9.30 बजे राव राजा राव नंदलाल मंडलोई की दौलतगंज एवं चंपाबाग स्थित छत्रियों पर सामूहिक पूजा-अर्चना की जाएगी और शहीदों के परिजनों के सहायतार्थ वेलफेयर फंड में सहायता राशि प्रदान की जाएगी। बड़ा रावला स्थित उनकी गादी का पूजन भी किया जाएगा।
राव राजा राव नंदलाल मंडलोई ने सन 1716 में इंदौर की स्थापना की थी। वे एक ऐसे दूरदर्शी शासक थे, जिन्होंने उस ज़माने में व्यापार-व्यवसाय के लिए सियागंज जैसे बाजार की स्थापना भी की और सियागंज को टैक्स फ्री जोन बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर इसे एक ऐसे केंद्र के रूप में स्थापित किया कि आज पूरे प्रदेश में बल्कि देश में भी सियागंज का नाम कारोबारी क्षेत्र में शीर्ष क्रम पर लिया जाता है। तिरला के विश्व प्रसिद्द युद्ध में राव राजा राव नंदलाल मंडलोई ने अपनी फ़ौज के साथ युद्ध कर विजयश्री प्राप्त की। इस युद्ध में उनके 12 हजार सैनिक शहीद हुए थे। युद्ध के दो माह बाद उन्होंने देह त्यागी थी। वर्तमान में राव राजा की इस गादी पर राव राजा श्रीकांत मंडलोई प्रतिष्ठित हैं। इंदौर के इस दूरदर्शी संस्थापक शासक की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों से शहीदों को नमन करते हुए उनके परिजनों की सहायता के लिए वेलफेयर फंड में सहायता राशि प्रदान करने का सिलसिला चला आ रहा है। इस बार भी 3 नवंबर को वेलफेयर फंड में सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उनके बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में जुनी इंदौर, बड़ा रावला स्थित एतिहासिक महल पर विशेष सजावट भी की जाएगी और उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनका पुण्य स्मरण किया जाएगा। शहीदों को नमन करते हुए रानी साहिबा माधवी मंडलोई जमींदार एवं युवराज वरदराज मंडलोई तथा अन्य सभी परिजन छत्रियों का पूजन करेंगे।
उल्लेखनीय है कि राव राजा राव नंदलाल मंडलोई ने 3 मार्च 1716 को सवाई राजा जयसिंह के साम्राज्य से संधि करने के साथ ही मुग़ल साम्राज्य एवं बाजीराव बल्लाल से संधि कर इंदौर के कारोबार को कर मुक्त करवाया था, जिससे उस युग में इंदौर का कारोबार पूरे भारतवर्ष में बिना टैक्स के फैलता गया और आज इंदौर को देश में एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में पूरे विश्व में पहचान मिल चुकी है, जिसका श्रेय राव राजा रावनंदलाल मंडलोई के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया जाता है।