
रंग-ए-महफ़िल और वनबन्धु परिषद की भागीदारी में हुई एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां, झूमते रहे श्रोता
इंदौर,
संस्था सेवा सुरभि की मेजबानी और जिला प्रशासन, इंदौर पुलिस, नगर निगम एवं विकास प्राधिकरण की सहभागिता में शनिवार की शाम को रवीन्द्र नाट्य गृह में पुणे से आए नामी कलाकारों ने देशभक्ति से प्रेरित “भारत हमको जान से प्यारा है” संगीत संध्या में अपने गीतों और संगीतमय प्रस्तुतियों से कुछ ऐसा जबरदस्त माहौल संजोया कि सभा गृह में मौजूद लगभग प्रत्येक श्रोता अपनी जगह पर ही झूम उठा। करीब 3 घंटे चले इस इंद्रधनुषी शाम में संस्था सेवा सुरभि के साथ रंग-ए-महफ़िल और वनबन्धु परिषद इंदौर चैप्टर की सहभागिता भी रही। प्रारंभ में सांसद शंकर लालवानी, संभागायुक्त सुदाम खाड़े, समाजसेवी टीकमचंद गर्ग, वीरेन्द्र गोयल, राजेश चेलावत, संस्था संयोजक ओमप्रकाश नरेडा ने दीप प्रज्वलन कर इस रंगारंग संगीत संध्या का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर सावनी रवीन्द्र द्वारा “वन्दे मातरम” की शुरुआती प्रस्तुति के बाद प्रख्यात गायक स्वरांश पाठक, आशुतोष जोशी, सुरभि सांखला और रूपक बुंदेला ने अभिजीत गौड़ के सधे हुए संगीत निर्देशन में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर पूरे समय खचाखच भरे सभा गृह को सम्मोहित बनाए रखा। प्रारंभ में संस्था सेवा सुरभि की ओर से अनिल गोयल, दिलीप अग्रवाल, अशोक मित्तल सहित अन्य साथियों ने सभी कलाकारों का स्वागत किया। सूत्रधार संजय पटेल ने 16 दिवसीय अभियान की जानकारी देते हुए अपने विशिष्ट अंदाज में सभी अतिथियों एवं कलाकारों का परिचय दिया और उन्हें मंच पर आमंत्रित किया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह के रूप में इंडिया गेट की प्रतिकृति गोविंद मंगल, मोहन अग्रवाल, अतुल शेठ, राजेश अग्रवाल, सीए नवीन खंडेलवाल, अरविन्द जायसवाल, पंकज कासलीवाल आदि ने भेंट की। सांसद और अतिथियों ने भी कलाकारों का स्वागत किया। इस अवसर पर रंग-ए-महफ़िल और वनबन्धु परिषद की ओर से भी कलाकारों का स्वागत किया गया। संस्था कलार्पण डांस एकेडमी की पूजा पटवर्धन के निर्देशन में “मैं रहूँ या न रहूँ, भारत ये रहना चाहिए“ देशभक्ति पर आधारित नृत्य प्रस्तुति के साथ इस संध्या का आगाज हुआ।
संगीत संध्या में स्वरांश पाठक ने भारत हमको जान से प्यारा है… कि प्रस्तुति देकर देश प्रेम का संग बिखेरा, वहीं सावनी ने “दिल है छोटा सा….” फिर स्वरांश ने सावनी के साथ “ये हंसी वादियाँ….”, “रोजा जानेमन” जैसे सदाबहार गीतों से माहौल को नया रंग दिया। इसके बाद आशुतोष जोशी ने एक बार फिर अपने अंदाज में वन्दे मातरम की शानदार प्रस्तुति दी तो सुरभि सांखला ने “गली में आज चाँद निकला“ और स्वरांश पाठक ने “कहने को जश्न-ए-बहारा है” और आशुतोष ने “माँ तुझे सलाम” और “रंग दे बसंती” की श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति देकर समूचे सभा गृह को जोश से भर दिया। उसके बाद सावनी ने “कहना ही क्या”, स्वरांश और सावनी ने “तू ही रे”, रूपक और सावनी ने “ए अजनबी”, सावनी ने “जिया जले”, रूपक और सावनी ने “ताल से ताल मिला” जैसे गीतों से समूचे सभा गृह को अलग-अलग रंगों में बांधे रखा। स्वरांश और सावनी ने “हाय रामा”, “साथियां” और आशुतोष तथा सावनी ने “रमता जोगी” से अपने सुर ताल का ऐसा जादू बिखेरा कि कब समय गुजर गया, पता ही नहीं चला। इसके बाद तो इन सभी गायकों ने “रमता जोगी”, “छैया-छैया”, “हम्मा-हम्मा” के बाद “जिया रे जिया रे”, “ससुराल गेंदा फुल”, “इश्क बिना”, “कहीं आग लगे”, “घूमर” और सबसे अंत में “मितवा सुन मितवा” से लेकर “चक दे इंडिया” और “जय हो” जैसी प्रस्तुतियों के साथ इस इंद्रधनुषी संगीत संध्या का समापन हुआ लेकिन तब भी श्रोताओं के चेहरों से लग रहा था कि अभी और थोड़ी देर यह सिलसिला चलते रहना चाहिए था।
