चातुर्मास के लिए विराजित तीन प्रमुख जैनाचार्यों का साकेत में पहली बार एकसाथ बिदाई का भावपूर्ण वरघोडा निकला

इंदौर, चातुर्मास स्वयं को बदलने और समाज तथा राष्ट्र को समृद्ध बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का ऐसा प्रभावी और पुण्यशाली प्रकल्प है जो हमें संतों और विद्वानों के सानिध्य में और अधिक सुदृढ बनाता है। इंदौर देवी अहिल्या की ऐसी पवित्र भूमि है जहाँ धर्म, सेवा और संस्कृति की ज्योत हमेशा प्रज्वलित बनी रहती है। पिछले 4 माह की अवधि में हम सबने शहर के दलालबाग, नरसिंहवाटिका, कंचन बाग एवं तिलकनगर क्षेत्रों में अनेक तपस्वी और विद्वानों से बहुत कुछ हासिल किया है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने मन, आचार – विचार और चरित्र में सकारात्मक बदलाव लाकर जिन शासन के साथ ही अपने राष्ट्र, समाज, संस्कृति और परिवार को भी करुणा, प्रेम, दया, सत्य, अहिंसा और परमार्थ जैसे सद्गुणों से भरपूर बनाएं। इंदौर से हम संतों को जो श्रद्धा, स्नेह और सम्मान मिला है उसे हम कभी नहीं भूल सकते। कार्तिक पूर्णिमा पर आज इंदौर के जैन समाज को एक ही मंच पर तीन-तीन आचार्यों के सत्संग की त्रिवेणी जैसा स्वर्णिम और दुर्लभ लाभ मिल रहा है।
ये दिव्य और प्रेरक विचार हैं इंदौर में विभिन्न जैनधर्म स्थलों पर चातुर्मास के लिए विराजित रहे जैनाचार्य प.पू. विश्व रत्न सागर म.सा., जैनाचार्य नयचंद्र सागर म.सा., जैनाचार्य मृदुरत्न सागर म.सा., गणिवर्य कीर्तिरत्न सागर म.सा., अजीतचन्द्र सागर म. सा. एवं अन्य साधु-साध्वी भगवंतों के, जो उन्होंने इंदौर से चातुर्मास की समापन बेला में बिदाई लेते हुए आयोजित वर्षावास परिवर्तन समारोह में व्यक्त किए। यह पहला अवसर था जब सागर समुदाय के सभी आचार्यों ने एकसाथ चातुर्मास परिवर्तन किया। सुबह सभी साधु-साध्वी भगवंत अलग-अलग स्थानों से विहार कर साकेत नगर स्थित साकेत क्लब पहुंचे जहाँ बड़ी संख्या में मौजूद समाजबंधुओं और शहर के प्रमुख जैन श्रीसंघों के पदाधिकारियों ने लाभार्थी दिलीप-ललित सी. जैन परिवार के साथ उनकी अगवानी की। करीब 60 साधु-साध्वी भवन्त इस समूह में शामिल थे, जो दलालबाग, तिलक नगर एवं कंचन बाग से अलग-अलग जत्थों में विहार कर साकेत क्लब और वहां से भव्य वरघोडा की शक्ल में लाभार्थी कमलाबाई चम्पालाल जैन के साकेत नगर स्थित निवास पर पहुंचे थे।
भव्य वरघोडा निकला – वरघोडा में बैंड-बाजों के अलावा रथ, बग्घी, कलश यात्रा, गरबा एवं भजन मंडलियाँ तथा मस्तक पर कलश लिए महिलाऐं भी शामिल रहीं। शहर के प्रमुख जैन श्रीसंघों की ओर से दिलसुखराज कटारिया, कान्तिलाल बम, वीरेंद्र जैन, मनीष सुराना, यशवंत जैन, प्रकाश भटेवरा, दीपक जैन टीनू, सुरेन्द्र छाजेड़, प्रीतेश ओस्तवाल, पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, शेखर गेलड़ा सहित अनेक प्रमुख समाजबंधुओं ने उनकी अगवानी की। पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता एवं अशोक चौहान “चांदू“ सहित अनेक राजनेता भी इस अवसर पर उपस्थित थे। यह पहला मौका है जब वर्षावास परिवर्तन के लिए शहर में विराजित तीनों प्रमुख जैनाचार्य और उनके साथ आए साधु-साध्वी भगवंत एकसाथ, एक ही स्थान पर विराजित होकर विभिन्न शहरों की ओर विहार करेंगे। शहर के जैन समाज में इतिहास में यह नई इबारत लिखी गई है जब एकसाथ तीन जैनाचार्यों को समूचे श्रीसंघों ने एकसाथ भावपूर्ण बिदाई दी है।
साकेत क्लब में आयोजित भावयात्रा एवं धर्मसभा में आशीर्वचन देते हुए जैनाचार्यों एवं अन्य वक्ताओं ने अपने इंदौर चातुर्मास से जुड़े प्रेरक संस्मरण सुनाए और खुले मन से इंदौर के जैन समाज की धर्मनिष्ठा की प्रशंसा की तथा सबके मंगल की भावना व्यक्त की। इसके साथ ही अब शहर में श्वेताम्बर जैन समाज के सभी चातुर्मासिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति संपन्न हो गई है।
