देश के मस्तक से गोहत्या का कलंक मिटाने
के लिए राजवाड़ा एवं गोपाल मंदिर पर प्रदर्शन

इंदौर । गो-सेवा भारती एवं चैतन्य भारत द्वारा गुरुवार को राजबाड़ा स्थित देवी अहिल्याबाई प्रतिमा के समक्ष उन गो भक्तों की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने गोपाष्टमी, 7 नवम्बर 1966 को दिल्ली में गो हत्या प्रतिबंध की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था और जिन्हें तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने पुलिस से गोली चलवाकर उनकी हत्या करा डाली थी।
इन गो भक्तों की शहादत और बलिदान की स्मृति को जिंदा रखने के लिए आज ‘ गो भक्तों का बलिदान याद रखेगा हिन्दुस्तान’, …. ‘ अहिल्या माता की जय’…. और ‘गो माता की जय’ जैसे नारों से आसमान गुंजायमान बनाए रखा। सभी गो भक्तों ने मौन रैली निकालकर हाथों में गोहत्या बंद करने के समर्थन में लिखी तख्तियां लेकर परिक्रमा की और गोपाल मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना पत्र समर्पित कर गोहत्या के कलंक को भारत के मस्तक से मिटाने की प्रार्थना की। इस मौके पर गो-सेवा भारती एवं चैतन्य भारत की ओर से अशोक गुप्ता, सुरेश पिंगले, नीलेश गंगराडे, दिलीप जैन, रमेश जुलानिया, चंद्रशेखर नीमा, प्रदीप अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में गोभक्त उपस्थित थे, जिन्होंने पहले देवी अहिल्या के चरणों में माल्यार्पण किया और फिर दिल्ली में हुए गोभक्तों के बलिदान और शहादत की स्मृति में 61 दीपक प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि समर्पित की। गो सेवा भारती के कैलाशचंद्र खंडेलवाल ने बताया कि कार्यक्रम में श्याम माहेश्वरी, डी पी शर्मा, रामचंद्र काकानी, राहुल आर्य, प्रदीप नीमा, बाबूलाल अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, राजन दुबे, विष्णु गुप्ता, उपेन्द्र वोरा एवं चंद्रशेखर स्वामी सहित अनेक गोभक्त उपस्थित थे, जिन्होंने राजवाड़ा की परिक्रमा के बाद हाथों में तख्तियां लेकर देश के मस्तक से गोहत्या के कलंक को मिटाने और गोहत्या बंद करने के लिए कड़ा केन्द्रीय कानून बनाने जैसे स्लोगन लिखकर उनका प्रदर्शन किया।
गोपाल मंदिर पहुंचकर सभी गोभक्तों ने अमर बलिदानी गोभक्तों को याद करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना पत्र समर्पित किया, जिसमें गोप्रेमी भगवान श्रीकृष्ण से गोहत्या के लांछन से देश को मुक्त बनाने की प्रार्थना की गई। प्रार्थना पत्र का वाचन नीलेश गंगराडे ने किया। अंत में दिलीप जैन ने आभार माना।
