अनजाने में किए पापकर्म तो क्षीण हो सकते हैं लेकिन जानबूझकर किए गए
पापों से तीर्थयात्रा और गंगा स्नान भी मुक्ति नहीं दिला सकते – पं. प्रभुजी नागर

इंदौर, । हम चाहे कितने ही तीर्थ और गंगा स्नान से लेकर पूजा-पाठ और अन्य अनुष्ठान करा लें, हमारे पाप कर्मों का फल हमें भुगतना ही पड़ेगा। यह भी याद रखें कि अनजाने में किए गए पाप तो भगवान के नाम जपने और प्रार्थना करने से क्षीण हो सकते हैं लेकिन जानबूझकर किए गए पाप कर्मों का फल हमें ही भुगतना पड़ेगा। यही नहीं इन सब पाप कर्मों का फल हमें मनुष्य के रूप में ही भुगतना होगा क्योंकि पशुओं को दर्द तो होता है, दुःख नहीं होता। दुःख की अनुभूति केवल इन्सान ही कर सकता है। गधों और कुत्तों के परिवार में बहू-बेटी नहीं होते। केदारनाथ और वैष्णों देवी की यात्रा वहां के खच्चर दिन में तीन बार कर लेते हैं लेकिन उन्हें पुण्य नहीं मिलता। इसलिए यह याद रखें कि दुर्लभ मनुष्य जीवन लेकर हम इस जन्म में जो कुछ कर्म कर रहे हैं, उनके फल हमें मनुष्य के रूप में ही भोगना होंगे। भगवान तत्व तो एक ही है लेकिन जैसे जल बर्फ और भाप के रूप में अलग-अलग गुण वाला बनकर अपने रूप और स्वभाव के अनुसार काम करता है वैसे ही परमात्मा भी ब्रह्म के रूप में राम, कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं के रूप में भक्त की प्रार्थना सुनकर हमारा हाथ थाम लेते हैं।
मालव माटी के सपूत, माँ सरस्वती के वरद पुत्र और प्रदेश में 200 से अधिक गौशालाओं के संचालक संत कमलकिशोर नागर के सुपुत्र तथा प्रख्यात भागवत मर्मज्ञ संत प्रभुजी नागर ने शनिवार को अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान तृतीय दिवस पर उपस्थित जन सैलाब को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य एवं प्रेरक विचार व्यक्त किए। पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, एमआईसी सदस्य निरंजन सिंह चौहान गुड्डू, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता आदि ने मुख्य यजमान सुरेश अग्रवाल, रामबाबू अग्रवाल, दिनेश बंसल पंप, सुखदेव पाटीदार, अनुग्रह जैन, हेमंत गर्ग, ओमप्रकाश बंसल पंप सहित अनेक भक्तों ने उनकी अगवानी की। मातृशक्ति की ओर से श्रीमती अनिता अग्रवाल, कृष्णा गर्ग, इंदिरा अग्रवाल, नेहा अग्रवाल, कृतिका अग्रवाल, सुनंदा लड्ढा, इंदुमती जैन एवं अलका गोयल ने अतिथियों का स्वागत किया। हिंदी और मालवी के मिलेजुले लहजे में मनोहारी भजनों के बीच प्रभुजी नागर की कथा श्रवण करने के लिए प्रतिदिन भक्तों का सैलाब बढ़ता जा रहा है। अन्नपूर्णा आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि, ओंकारेश्वर अन्नपूर्णा मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद गिरि, स्वामी जयेंद्रानंद गिरि तथा छत्रीबाग स्थित नरसिंह मंदिर के वरुण महाराज सहित अनेक संत भी प्रतिदिन आम श्रोताओं के बीच बैठकर कथा श्रवण कर रहे हैं। भक्तों की बढती संख्या को देखते हुए पंडाल का विस्तार करने की गुंजाईश रखी गई है। मंच का संचालन राजेश अग्रवाल ने किया। अन्नपूर्णा के इस परिसर में पं. प्रभुजी अपने श्रीमुख से 12 नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा करेंगे। पं. नागर के भजनों पर नाचने-गाने का सिलसिला तो पहले दिन से ही चल रहा है। आज भी उन्होंने चार भजन सुनाए और इस दौरान मानो समूचा पंडाल थिरकता रहा।
पं. नागर ने सनातन धर्म के प्रतिनिधि ग्रन्थ भागवत, संतों और माँ अन्नपूर्णा के चरणों में वंदन करते हुए कहा कि यदि भगवान पृथ्वी पर अवतार नहीं लेते तो हम सब लोगों के सिर पर कई जन्मों के पापों की जो गठरी बंधी हुई है उसके बोझ से हम अगला सूरज भी नहीं देख पाते। यह ब्रह्म की बहुत बड़ी कृपा है कि वे अलग-अलग स्वरूपों में पृथ्वी पर अवतार लेकर अपने भक्तों की मदद करते हैं। जैसे ब्रह्म के अलग-अलग नाम, स्वरुप और स्वभाव हैं वैसे ही हम पानी का उदाहरण लें जो फ्रिज में रखने पर बर्फ और चूल्हे पर तपाने पर भाप बन जाता है। तत्व तो एक ही है लेकिन बर्फ और भाप के गुण अलग-अलग हैं। सर्दी में बर्फ काम नहीं करेगा और गर्मी में भाप किसी काम की नहीं।
पं. नागर ने कहा कि ब्रह्म के जो तीन रूप हैं वे अलग-अलग देवताओं के रूप में पृथ्वी पर अवतरित होकर हमारे आधार बनकर हमारी लाज बचा लेते हैं। भगवान ने हमें मनुष्य जन्म देकर कंचन काया दी है यही उसकी सबसे बड़ी कृपा है। याद रखें कि दुःख की अनुभूति मनुष्य को ही होती है, पशुओं को तो दर्द होता है। जानवरों के बेटा-बहू और परिवार नहीं होते। हम सबके तो परिवार और नाते-रिश्ते हैं, इसीलिए दुःख और अपमान की स्थिति इंसानों में ही होती है। जानवरों को ना तो अपमान महसूस होता है न ही अकेलापन। दुःख भोगना ही कर्म फल घटने जैसा है। कर्मों का फल हमें ही भोगना है, यही आत्म दर्शन है।
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि हमारे पास कुछ नहीं है लेकिन आप उँगलियों पर पहले इस बात की गिनती लगाएं कि भगवान ने हमें क्या-क्या दिया है और फिर यह भी देखें कि भगवान ने हमें क्या-क्या नहीं दिया है। निश्चित ही भगवान ने हमें जो कुछ दिया है उसकी गिनती लिखते-लिखते हमारी पूरी खाताबही भर जाएगी, पेन की स्याही खत्म हो जाएगी, लेकिन भगवान ने जो कुछ दिया है उसकी गिनती पूरी नहीं होगी। जबकि जो नहीं दिया है वह जरुर गिनने लायक होगा। जीवन में कभी भी अपना माथा मत ठोंकना कि हमारे पास कुछ नहीं है या बहू-बेटे हमारी बात नहीं सुनते। हम यदि अपनी जुबान का सदुपयोग करें तो जेब से ज्यादा भारी जुबान लगेगी क्योंकि बड़े से बड़ा धन्नासेठ जेब में 5 -10 हजार रुपए से ज्यादा लेकर नहीं चलता लेकिन यदि वह अपनी जुबान से किसी को बाजार में केवल बोल दे या फोन कर दे तो 5-10 करोड़ रुपए मिल जाएँगे। जेब से ज्यादा जुबान भारी होती है इसलिए इस जुबान का सदुपयोग भगवान का नाम जपने में करते रहें। अंतिम क्षणों तक भगवान का नाम जपेंगे तो हम सबको हमारी मंजिल जरुर मिल जाएगी। राम और कृष्ण जैसे हमारे आधार स्तंभ हमेशा हमारे साथ खड़े रहेंगे। कलियुग तो नाम आधार का ही युग माना गया है। जिन्होंने राम और कृष्ण के सत्संग की अनुपम जोड़ी बना ली उनके जीवन की धन्यता अनूठी ही रहेगी।
पं. नागर की इस कथा का श्रवण करने के लिए दिनों-दिन भक्तों की संख्या बढती जा रही है। कथा आयोजक सुरेश अग्रवाल ने बताया कि अधिक संख्या में श्रद्धालु आएँगे तो पंडाल का और भी विस्तार करने की व्यवस्था की हुई है। भक्तों की सुविधा के लिए कथा स्थल पर बैठक व्यवस्था, मेगा स्क्रीन, साफ़सफाई, रोशनी, पेय जल, वाहनों के निःशुल्क पार्किंग, गोसेवा सहित समुचित प्रबंध किए गए हैं।
