क्रिश्चियन कॉलेज की 400 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया है , प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1887 में होलकर रियासत के समय महारानी भागीरथी बाई होल्कर द्वारा कैनेडियन मिशन को महिला अस्पताल और स्कूल चलाने के उद्देश्य से दी गई थी।लीज की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि जब तक जमीन का उपयोग अस्पताल और स्कूल के लिए होगा, तब तक ही यह चर्च के पास रहेगी। उपयोग बंद होने की स्थिति में जमीन शासन को वापस लेने का अधिकार रहेगा।
खसरा नंबर 407/1669/3 की कुल 68.303 हेक्टेयर भूमि में से 1.702 हेक्टेयर पर क्रिश्चियन कॉलेज संचालित है। कॉलेज प्रबंधन ने परिसर की शेष जमीन पर व्यावसायिक कार्यालय, दुकानें और अन्य निर्माण के लिए नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया था इसी प्रक्रिया के दौरान नजूल भूमि से संबंधित आपत्तियां सामने आईं और प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में जमीन को सरकारी नजूल पाया गया, जिसके बाद कलेक्टर की कोर्ट में धारा 182 के तहत सुनवाई की गई। इसके बाद प्रबंधन पहले हाई कोर्ट और बाद मे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि कलेक्टर कानून के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह तय हो गया था कि अंतिम फैसला कलेक्टर ही लेंगे।

लीज शर्ता के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने जमीन को शासन में समाहित करने के आदेश पारित किए। जांच में सामने आया कि वर्षों से जमीन का उपयोग तय उद्देश्य के अनुसार नहीं किया जा रहा है और मिशनरी संस्था भी अब अस्तित्व में नहीं है।अनुदान को निरस्त करते हुए शासन अनुविभागीय अधिकारी जूनी इंदौर और अपर तहसीलदार जुनी इंदौर को कब्जा लेने के लिए निर्देशित किया। अब प्रशासन जल्द जमीन पर कब्जा लेगा।
