रेसकोर्स रोड स्थित बास्केटबाल स्टेडियम पर हजारों समाजबंधुओं की मौजूदगी में जैनाचार्यों ने दिया नया नाम, स्टेडियम गूंज उठा जयघोष से – इंदौर में 11 और दीक्षाएँ कराने का संकल्प

इंदौर,। रेसकोर्स रोड स्थित बास्केटबाल स्टेडियम पर रविवार को करीब 6 घंटे चले दीक्षा महोत्सव में हैदराबाद-सिकंदराबाद के युवा आर्किटेक्ट, मुमुक्षु कौशिक कुमार खांटेड ने संसारी और अपना वैभव संपन्न जीवन त्यागकर नया वेश और नया नाम धारण कर लिया। जैनाचार्य प.पू. विजय पद्मभूषणरत्न सूरीश्वर म.सा., आचार्य देव प.पू. विजय जिनसुंदर सूरीश्वर म.सा. एवं आचार्य विजय धर्मबोधि सूरीश्वर म.सा. सहित 50 से अधिक साधु-साध्वी-भगवंतों की निश्रा में हजारों समाजबंधुओं की मौजूदगी और भगवान महावीर स्वामी, दादा शांतिनाथ और जैनाचार्यों के जयघोष के बीच जैसे ही मुमुक्षु कौशिक कुमार को ओघा सौंपा गया, वे झूमकर नृत्य करने लगे।
समवशरण की साक्षी में उन्होंने करीब 6 घंटे चले दीक्षा महोत्सव में अपना संसारी परिधान त्यागकर साधु का वेश और नया नाम ख़ुशी-ख़ुशी धारण किया। इस मौके पर दीक्षा मंडप से इंदौर में 11 और युवाओं की दीक्षाएँ कराने का संकल्प व्यक्त किया गया और महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं अन्य राज्यों से आए दीक्षा के अभिलाषी इन 11 युवकों का परिचय कराते हुए बहुमान भी किया गया तो समूचा सभागृह एक बार फिर जयघोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर शहर के समर्पण ग्रुप की ओर से विनोद जैन, रितेश जारोली,विकास गांधी, रेसकोर्स रोड जैन श्रीसंघ की ओर से डा. प्रकाश बागानी, यशवंत जैन, प्रकाश भटेवरा, कीर्ति भाई डोसी, प्रवीण गुरूजी, युग प्रधान परिवार से निमेश भाई शाह, द्वारकापुरी संघ के संजय नाहर, कल्पक गांधी, देवेन्द्र झवेरी, कैलाश नाहर,दिलसुखराज कटारिया, पुण्यपाल सुराना, मनीष शाह,जिनेश्वर जैन,मनीष सुराना, अरुणा कोठारी, विपिन सोनी, रेखा जैन सहित अनेक जैन श्रीसंघों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी भी मौजूद थे जिनका आयोजन समिति की ओर से बहुमान किया गया
समर्पण ग्रुप एवं युगप्रधान प्रवज्या महामहोत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस दीक्षा महोत्सव में स्टेडियम और दर्शक दीर्घा सुबह 7 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक खचाखच भरे रहे। चूँकि मुमुक्षु सिकंदराबाद –हैदराबाद के मूल निवासी हैं इसलिए बड़ी संख्या में दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों के समाजबंधु भी स्टेडियम में मौजूद रहे। जैनाचार्यों ने जब कौशिक कुमार को संसारी वेशभूषा में मंच पर आमंत्रित कर जैसे ही सन्यास जीवन का प्रतीक ओघा उनके हाथों में सौंपा, कौशिक कुमार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। वे समवशरण की परिक्रमा कर नाचने लगे। इसके बाद शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ विभिन्न क्रियाओं, मंत्र दीक्षा, नंदी सूत्र और अन्य विधियों के बाद उन्हें वेश परिवर्तन के लिए अलग कक्ष में ले जाया गया जहाँ से करीब 1 घंटे बाद जब वे ढोल-ढमाकों के साथ वापस लौटे तो उनका केश लोच (मुंडन) हो चुका था, उन्होंने साधु वेश धारण कर लिया था और हाथ में लाठी लेकर वे मंच पर आए तो वासक्षेप और अक्षत की वर्षा के बीच पहले जैनाचार्यों तथा बाद में हजारों समाजबंधुओं ने उनका अभिनंदन कर सन्यास जीवन की उनकी नई राह के लिए उन्हें शुभकामनाएँ और शुभाशीष सौंपे।
इस बीच विजय जिनसुंदर सूरीश्वर म.सा. एवं आचार्य विजय धर्मबोधि सूरीश्वर म.सा. तथा अन्य साधु-साध्वी-भगवंतों ने उन्हें उनका नया नाम मुनिराज कलश पुण्यविजय घोषित कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किए। प्रन्यास प्रवर तत्वरूचि विजय म.सा. उनके नए गुरु होंगे। इस तरह करीब 6 घंटे चली शास्त्रोक्त विधियों के बाद सिकंदराबाद का यह 21 वर्षीय युवा आर्किटेक्ट अब त्याग, संयम और साधना की राह पर अपने नए नाम के साथ चल पड़ा। दीक्षा संपन्न होते ही नए मुनि कलशपुण्य विजय म.सा. अपने संघ के साथ देवास के लिए विहार करेंगे।
अपने आशीर्वचन में जैनाचार्य प.पू. विजय जिनसुंदर सूरिश्वर म.सा. ने कहा कि कौशिक कुमार ने अब संसार के वैभव और प्रपंचों को छोड़कर समर्पण, संयम, त्याग और सेवा का मार्ग अपनाया है। दुनिया के धन-दौलत और धन-संपदा को छोड़ना बड़ा मुश्किल काम है। एक बच्चे से मोबाइल की लत छुड़ाना कितना कठिन काम है ये हम सब जानते हैं। वे माता-पिता और बहनें धन्य हैं जिन्होंने अपने इकलौते बेटे और भाई को जिन शासन की समृद्धि के लिए सौंपा है।
करतल ध्वनि के बीच दीक्षा मंडप से जब इंदौर में 11 दीक्षा कराने और मंच से उन सभी युवकों का परिचय कराते हुए बहुमान किया गया, तो एक बार फिर दीक्षा मंडप भगवान और दीक्षार्थियों के जयघोष से गूंज उठा। इन युवकों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान एवं अन्य राज्यों के शहरों से आए हंसमुख, वीरेन्द्र, अक्षत, पुष्कर, अमिश, उन्नत, अभिषेक, पारस कुमार के नाम प्रमुख हैं जो दीक्षा के लिए तैयार हैं। इनमें से कई युवा तो अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं और एक परिवार ऐसा भी है जिसके दोनों बेटे दीक्षा लेना चाहते हैं। रेसकोर्स रोड श्रीसंघ के यशवंत जैन ने युवाओं के इस संकल्प की अनुमोदना करते हुए घोषणा की कि इंदौर में 11 तो ठीक, 21 दीक्षाएँ भी होगी तो उनका श्रीसंघ और इंदौर का जैन समाज इस एतिहासिक उत्सव की मेजबानी करने को तैयार है ।
