इंदौर मे सबसे बड़े सरकरकारी अस्पताल के सरकारी डॉक्टर निजी परामर्श के साथ निजी अस्पताल मे मरीजों को रेफर करने का कार्य करके अस्पताल की शाख पर धब्बा लगा रहे है, स्थिति यह है कि ये डॉक्टर सरकार से मोटी तनख्वाह लेने के बावजूद सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज नहीं कर रहे। सरकारी अस्पताल की ओपीडी के समय में निजी क्लीनिक में मरीजों को देखते हैं और इसके एवज में मोटी फीस भी वसूल रहे हैं। सभी डॉक्टरों को ड्यूटी के दौरान दोपहर दो बजे तक एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रहना पड़ता है, लेकिन अटेंडेंस लगाकर यहां से चले जाते हैं। जब कोई परेशान मरीज इनसे फोन पर इलाज की बात करता है तो यह निजी क्लीनिक पर ही बुलाते हैं। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इसके कारण आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।ऐसे ही एक मामले में ओपीडी समय में अपने निजी क्लीनिक त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल नागर की शिकायत की गई है ।

मामला डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया तक पहुंचा और जांच कमेटी गठित कर दी गई। शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत में बताया है कि बुधवार दोपहर करीब 12 बजे वह एमवाय अस्पताल में उपचार के लिए गया था, लेकिन उसे डॉ. नागर नहीं मिले। जब उन्हें फोन लगाया तो उनके सहायक ने कहा कि परामर्श के लिए साकेत नगर स्थित क्लीनिक पर आना होगा।यह पहली बार नहीं है जब एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की निजी क्लीनिक पर काम करने की शिकायत हुई है। इससे पहले भी डॉ. अतुल शेंडे, डॉ. संजय खरे, डॉ. जुबिन सोनाने, डॉ. विनोद राज आदि की शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन सिर्फ चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया। अब तक जिम्मेदारों ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
इसके पूर्व भी लामा ( मेडिकल सलाह के विरुद्ध मरीज को छुट्टी देकर ) अन्य सरकारी हॉस्पिटल मे रेफर करने के मामले मे शिकायत के बाद एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काट कर एक लामा प्रकरण हेतु एक रिव्यू कमेटी बनाकर अस्पताल प्रशासन ने इति श्री कर ली जबकि अस्पताल मे आयुष्मान कार्ड धारकों को लगातार अछे और निशुल्क इलाज के नाम पर निर्जी अस्पताल मे रेफर किया जा रहा है जिसकी एवज मे निजी अस्पताल सरकारी डॉक्टर को 10 प्रतिशत तक कमीशन देते है
