बालाघाट

मिशन शक्ति अन्तर्गत 07 दिसम्बर को कस्तुरबा गांधी बालिका छात्रावास बैहर में कैरियर काउंसलिंग कर मिशन शक्ति व बाल विवाह रोकने के उपाय आदि की विस्तृत जानकारी बच्चों को दी गई। किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य श्रीमति माधुरी पटले, एसआई दीपिका सिंगौर व प्रीती हरिनखेडे वन स्टाप सेंटर द्वारा बताया गया कि ज़रूरतमंद बच्चों (जो उपेक्षित, दुर्व्यवहार के शिकार हैं या बेसहारा हैं) को सुरक्षित आश्रय और देखभाल प्रदान करना, जैसा कि Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 से संबंधित एक दस्तावेज़ में वर्णित है। पुनर्वास और सशक्तिकरण बच्चों के कौशल विकास, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करना ताकि वे समाज में अपनी पहचान बना सकें और अपराध से दूर रह सकें.कानूनी प्रक्रिया में भिन्नता: बच्चों को वयस्कों से अलग, उनके अनुरूप प्रक्रिया के माध्यम से न्याय देना, जिसमें उन्हें दंडित करने के बजाय सुधार के अवसर दिए जाते हैं.सामाजिक पुन: एकीकरण: बच्चों को सफलतापूर्वक उनके परिवारों या समुदाय में वापस लाने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करना, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। मामलों का निपटारा किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) और बाल कल्याण समितियों (Child Welfare Committees) के माध्यम से बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई करना, चाहे वे अपराधी हों या देखभाल के ज़रूरतमंद हों.दोषियों के लिए दंड (अंतिम उपाय): गंभीर मामलों में, सजाएँ दी जाती हैं, लेकिन वे वयस्कों के लिए तय की गई है वन स्टॉप सेंटर (OSC) योजना भारत सरकार की एक पहल है, जिसे ‘सखी’ के नाम से भी जाना जाता है, जिसका उद्देश्य निजी और सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा से प्रभावित सभी महिलाओं को एक ही छत के नीचे एकीकृत सहायता और सहयोग प्रदान करना है, जिसमें अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता, कानूनी मदद और मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हैं, ताकि वे सुरक्षित और सशक्त महसूस कर सकें।
