अखंड धाम पर चल रहे 58वें अ.भा. संत सम्मेलन में आज सुबह होगी हजारों दीपों से महाआरती

इंदौर । भारत भूमि में हमारा जन्म लेना तभी फलीभूत होगा, जब हम अपनी सनातन संस्कृति के अनुरूप आचरण करेंगे। भारत भूमि की पहचान धर्म से है, धन से नहीं। विश्व में अब क्रांति का नेतृत्व भारत ही करेगा। आज पूरी दुनिया में वेदांत और भारतीय सनातन संस्कृति से जुड़े संतों की वाणी गूंज रही है। वेदांत का मूल तत्व ज्ञान ही है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य का आचरण पशुवत माना गया है। हमारी सनातन संस्कृति, धर्म और सदभाव की बुनियाद पर टिकी हुई है, लेकिन किसी को भी हमारी सौजन्यता का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भारत की धरती पर जिन्होंने जन्म लिया है, उन्हें भारत माता की जय बोलना ही चाहिए। वेद-वेदांत और धर्म -संस्कृति की ताकत से ही हमारा देश एक बार फिर से विश्व गुरु बनेगा, इसके संकेत हम रोजाना देख रहे हैं।
ये दिव्य और ओजस्वी विचार हैं मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती के, जो उन्होंने मंगलवार को बिजासन रोड स्थित अविनाशी अखंड धाम आश्रम पर चल रहे 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन की धर्मसभा में व्यक्त किए। सम्मेलन में आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ.स्वामी चेतन स्वरूप की अध्यक्षता में, सिद्धपीठ आश्रम उज्जैन के महामंडलेश्वर स्वामी नारदानंद, वेनेजुएला, साउथ अमेरिका से आई साध्वी शीला माँ, स्वामी परमानन्द, हंसदास मंठ के महामंडलेश्वर महंत रामचरणदास महाराज, पं. पवनदास महाराज, अ. भा. संत समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी रामकृपाल दास, रतलाम के महामंडलेश्वर स्वामी देवस्वरूप एवं साध्वी नीलभारती, भीलवाडा से आए स्वामी प्रकाशानंद, वृंदावन के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश्वरानंद, वृंदावन से ही आए स्वामी केशवानंद, डाकोर के वेदांताचार्य स्वामी देवकीनंदनदास, साध्वी आदित्य चेतना गिरि, चौबारा जागीर के संत नारायणनानंद, उज्जैन के वेदान्ताचार्य स्वामी वीतरागानंद, नैमिषारण्य से आए स्वामी पुरुषोत्तमानंद, एवं संत राजानंद ने भी अपने प्रेरक विचार व्यक्त किए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, उज्जैन सिंहस्थ में मेला प्रभारी रहे वरिष्ठ नेता माखन सिंह, भारत माता की आरती गाने वाले बाबा सत्यनारायण मौर्य, समाजसेवी टीकमचंद गर्ग, रामबाबू अग्रवाल, राजेश रामबाबू, दिनेश गोयल पचोर, हाई कोर्ट बार एसो के अध्यक्ष रीतेश इनानी, सचिव लोकेश मेहता, पोरवाल समाज के अध्यक्ष सीए संजय गुप्ता, चम्बल क्षेत्र अग्रवाल समाज के समाजसेवी अतुल अग्रवाल, डी एल गोयल, शरद गुप्ता सहित अनेक विशिष्ठ अतिथियों ने संत सम्मेलन में पहुंचकर देश-विदेश से आए संतों का अभिनंदन और सम्मान किया। इस अवसर पर आयोजन समिति की ओर से स्वागताध्यक्ष विष्णु बिंदल, अध्यक्ष हरि अग्रवाल, अशोक गोयल, दीपक जैन टीनू, भावेश दवे, ठा. विजय सिंह परिहार, डॉ. कमल हेतावल, चंद्रप्रकाश गुप्ता, राजेंद्र सोनी, विनय जैन, महेंद्र विजयवर्गीय, जवाहरलाल शर्मा, राजेंद्र गर्ग, मुरलीधर धामानी, राहुल शर्मा आदि ने सभी संतों एवं मेहमानों का स्वागत किया। मंच का संचालन हरि अग्रवाल एवं स्वामी नारायणानंद ने किया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अभी अतिथियों ने सम्मेलन में आए संतों का स्वागत कर उनके आशीर्वाद भी प्राप्त किए वहीँ संतों ने भी महपौर सहित सभी अतिथियों का सम्मान किया।
किसने क्या कहा- उज्जैन सिद्धाश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी नारदानंद महाराज ने कहा कि परमात्मा का सृष्टि में मनुष्य को नर से नारायण बनने के भी अवसर उपलब्ध हैं। सनातन धर्म ही सत्य है। अखंड धाम जैसे आश्रम सनातन धर्म की ज्योत को निरंतर प्रज्ज्वति बनाए रखे हुए हैं। वृंदावन-हरिद्वार से आए स्वामी जगदीश्वरानंद ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि संसार के मोह-माया के जंजाल से मुक्त हों, लेकिन यह मुक्ति हमें किसी सेना या हथियार की मदद से नहीं, बल्कि सदग्रंथ, सदगुरू और सत्संग से ही मिलेगी। रतलाम से आए स्वामी देवस्वरूप महाराज ने कहा कि हमारा मन संकल्प विकल्प से घिरा रहता है। संतों की कृपा से ही हम अपनी आत्मा के सत्य, आनंद और चेतन्य स्वरूप को पहचान सकते हैं। संतों का समागम ही पहली भक्ति है। जन्म-मृत्यु की सत्ता को हम तभी पहचान पाएंगे, जब हमारा अज्ञान दूर होगा। सदगुरू अखंडानंद महाराज के सानिध्य में रहे संत इसीलिए आज भी त्याग और साधना के जीवंत उदाहऱण बने हुए हैं। डाकोर से आए वेदांताचार्य स्वामी देवकानंदन दास ने कहा कि वेदांत का अध्ययन मनुष्य को संस्कारित और वास्तविक ज्ञान से परिपूर्ण बनाता है। सम्मेलन में स्वामी नारायणनानंद ने कहा कि वेद-वेदांत और धर्म-संस्कृति हमारे जीवन का अनिवार्य अंग है। सनातन धर्म में हम आदि-अनादि काल से जीते आ रहे हैं और आगे भी जीते रहेंगे, इसे कोई मिटा नहीं सकता। हंसदास मठ के महामंडलेश्वर पवन दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म कभी नष्ट नहीं हो सकता। सनातन ही शाश्वत और सनातन ही सत्य है। संत राजानंद ने कहा कि आज पूरी दुनिया में वेदांत और भारत के संतों की वाणी गूंज रही है। यह देश भक्तों, संतों और ऋषि-मुनियों की तपस्थली रहा है इसलिए इस देश पर कभी आंच नहीं आ सकती। हमारे देश में तो विरांगनाओं की शौर्यगाथाएं भी पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक गूंज रही है। महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप ने कहा कि आने वाले समय में भारत ही विश्व का नेतृत्व करेगा। आज पूरे विश्व में भारत को लेकर आशा भरी निगाहें उठी हुई हैं। हम सब संगठित होकर सामने आई चुनौतियों का मुकाबला करेंगे तो कोई भी ताकत हम पर हावी नहीं हो सकती। जरूरत है हम सबको एकजुट और संगठित होकर सनातन धर्म के शत्रुओं का मुकाबला करने की।
आज के कार्यक्रम – सुबह 9 बजे से प्रवचन- 11.30 बजे आरती- अखंड धाम पर चल रहे 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन के सातवें दिन 10 दिसंबर को सुबह 9 बजे से संत सम्मेलन की कार्रवाई प्रारंभ हो जाएगी। मुंबई से आए महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती के सानिध्य एवं आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरुप की अध्यक्षता में सुबह 9 से 9.30 तक गुरूवंदना, 9.30 से 10 बजे तक वृंदावन से आए स्वामी जगदीश्वरानंद, 10 से 10.30 तक वृंदावन, डाकोर, हरिद्वार एवं अन्य तीर्थस्थलों से आए संतों के आशीर्वचन तथा 10.30 से 11 बजे तक संत सम्मेलन के अन्य अतिथियों के आशीर्वचन के पश्चात 11 से 11.30 बजे तक ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद की 58वीं पुण्यतिथि पर हजारों श्रद्धालु अपने–अपने घरों से लाई गई सुसज्जित दीपों की थालियों से स्वामी अखंडानंद की आरती करेंगे। सम्मेलन में आए संतों को विदाई भी दी जाएगी।
