सेवा, त्याग और परमार्थ के भाव से किए गए
कर्म युगों-युगों तक हमारा मार्गदर्शन करते हैं
इंदौर ।
संत, विद्वान और महापुरुषों का चिंतन हमेशा समाज के कल्याण की दृष्टि से होता है। सेवा, त्याग और परमार्थ के भाव से किए गए उनके कर्म युगों-युगों तक हमारा मार्गदर्शन करते हैं। सदकर्मों की सुगंध कभी नष्ट नहीं हो सकती। मनुष्य का शरीर भले ही नश्वरवान हो लेकिन उनके कर्म हमेशा स्मृति पटल पर अंकित रहते हैं। अखंड धाम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद महाराज ऐसे ही तपोनिष्ठ संत थे जिन्होंने अपने जीवनकाल में सनातन धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए अपना समूचा जीवन समर्पित बनाए रखा। उनकी यादें हमारे लिए मील का पत्थर बनाकर हमेशा मार्गदर्शन करती रहेंगी।
ये दिव्य विचार हैं आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतन स्वरुप के, जो उन्होंने बिजासन रोड स्थित अविनाशी अखंड धाम आश्रम पर चल रहे 58वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन के विराम प्रसंग पर सानिध्य देते हुए आशीर्वचन के रूप में व्यक्त किए। प्रख्यात संत महर्षि उत्तम स्वामी के सानिध्य में इस अवसर पर आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंद महाराज को पुष्पांजलि एवं हजारों दीपों से उनके चित्र के समक्ष महाआरती का अनूठा और परंपरागत आयोजन सौल्लास संपन्न हुआ। पुष्पांजलि सभा में आश्रम परिवार के वरिष्ठ न्यासी एवं समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, निर्मल गुप्ता (उज्जैन), मन्नूलाल गर्ग (देवास), हरि अग्रवाल, ठा. विजय सिंह परिहार, सुश्री किरण ओझा तथा संत समाज की ओर से वृंदावन से आए वृंदावन से आए स्वामी जगदीश्वरानंद, डाकोर से आए स्वामी देवकीनंदन दास, साध्वी आदित्य चेतना गिरि, चौबारा जागीर से आए संत नारायणानंद, वृंदावन से आए संत केशवानंद, संत राजानंद आदि ने ब्रह्मलीन अखंडानंद महाराज से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाए। स्वामी अखंडानंद जी ने पूरे देश में 300 से अधिक आश्रमों की नींव रखकर धर्म, संस्कृति, सेवा और परमार्थ के प्रकल्पों की स्थापना की जो आज भी जीवंत बने हुए हैं।
प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से स्वागताध्यक्ष विष्णु बिंदल, अध्यक्ष हरि अग्रवाल, संयोजक अशोक गोयल, महासचिव दीपक जैन टीनू, संगठन सचिव भावेश दवे, कोषाध्यक्ष किशोर गोयल, हेमंत खंडेलवाल, चंद्रप्रकाश गुप्ता, राजेंद्र सोनी, महेंद्र विजयवर्गीय, डॉ. चेतन सेठिया, डॉ. हरिनारायण विजयवर्गीय, राजेंद्र सिंह जादोन, शेषनारायण यादव, जवाहरलाल शर्मा, मुरलीधर धामानी, सचिन सांखला, रणधीर दग्धी, आदित्य सांखला, किशोर सांखला, शंकरलाल वर्मा, राहुल शर्मा, परीक्षित पंवार, पलकेश कछवाहा, मातृशक्ति की ओर से ज्योति श्रीवास्तव, वर्षा जैन, राजकुमारी मिश्रा आदि ने सभी संतों एवं मेहमानों का स्वागत किया। मंच का संचालन हरि अग्रवाल एवं स्वामी नारायणानंद ने किया। आयोजन में श्रद्धा सुमन सेवा समिति, छत्रीबाग जन सेवा समिति, अखंड युवा मंडल, सांखला कालोनी रहवासी संघ की ओर से भी संतों पर पुष्पवर्षा की गई।
घर-घर से लाए गए दीप और पूजा की थालियां – पुण्यतिथि के अवसर पर हजारों श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं अपने-अपने घरों से दीपकों की थाली और फूलों से श्रृंगारित आरती सजाकर लाई थी। शंकराचार्यजी के सानिध्य में जैसे ही महाआरती शुरू हुई, अखंड धाम परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की आस्था-श्रद्धा देखने लायक थी। अंत में अध्यक्ष हरि अग्रवाल ने सात दिवसीय संत सम्मेलन में सहयोग देने वाले सभी संतों, भक्तों, मीडिया, प्रशासन, पुलिस, दानदाता एवं कार्यकर्ता बंधुओं का आभार व्यक्त किया।

