उज्जैन रोड स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को प्रत्येक वर्षाकाल में 18 पौधे रोपने और देखभाल करने की शपथ

इंदौर।
प्रकृति भी परमात्मा का ही अंश है। जैसे परमात्मा इतना सबकुछ देने के बाद भी हमसे कुछ नहीं लेते, उसी तरह प्रकृति भी हमें स्वच्छ पर्यावरण और अन्य मूल्यवान उपहार देने के बाद भी बदले में कुछ नहीं लेती। व्यक्ति अपने जीवनकाल में करीब 8 से 10 क्विंटल लकड़ी का प्रयोग करता है इसमें 4 क्विंटल लकड़ी अंतिम संस्कार के समय काम आती है। यदि इसी तरह हम जीवनभर लकड़ी का प्रयोग करते रहेंगे तो पौधों का बचना संभव ही नहीं रह पाएगा इसलिए संकल्प करें कि हम अपने जीवनकाल में कम से कम 18 पौधे लगाएं और उनके बड़े होने तक उनकी पूरी तरह देखभाल भी करें। प्रकृति का संतुलन दिनों दिन इसी वजह से बिगड़ रहा है कि हम प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करते जा रहे हैं चाहे हवा हो या पानी अथवा पेड़-पौधे या मिटटी। इसी तरह से हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे तो आने वाली पीढियां हमें माफ़ नहीं कर पाएंगी। प्रकृति से लेना नहीं देना भी सीखें।
ये प्रेरक और भावपूर्ण विचार हैं प्रयागराज से आए मानस मर्मज्ञ आचार्य शांतनु महाराज के, जो उन्होंने उज्जैन रोड स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य शांतनु महाराज ने कॉलेज प्रबंधन के आग्रह पर छात्रों से मुलाकात भी की और उनसे विभिन्न जानकारियां प्राप्त करने के बाद उक्त प्रेरणादायी विचार साझा किए। इस अवसर पर संस्था शिवदीप के प्रमुख संदीप गोयल ऑटो, संस्था छवि वेलफेयर सोसाइटी के प्रमुख गोपाल गोयल, अग्रवाल समाज इंदौर फाउंडेशन के किशोर गोयल तथा संजय बांकडा एवं संस्था वनदेवी आयोजना की ओर से सरस्वती पेंढारकर भी आचार्यश्री के साथ उपस्थित थे। कॉलेज के छात्रों को आचार्यश्री ने शपथ दिलाई कि वे अपने जीवनकाल में कम से कम 18 पौधे तो रोपेंगे ही बल्कि हर वर्षा काल के दौरान अधिक से अधिक पेड़ लगाकर प्रकृति की सेवा करेंगे, जल का दुरूपयोग नहीं करेंगे और प्रकृति के संरक्षण की दिशा में हरसंभव प्रयास करेंगे। कॉलेज प्रबंधन की ओर से श्रीमती संध्या चौकसे एवं सुप्रभात चौकसे ने आचार्यश्री एवं सभी मेहमानों की अगवानी की।
