सेटेलाइट जंक्शन कॉलोनी में मिले शवों को परिजनों ने लेने से किया इंकार तो पुलिस ने संस्थाओं को सौंपे शव
इंदौर
पिछले गुरुवार को लसुड़िया थाना क्षेत्र स्थित सेटेलाइट जंक्शन कॉलोनी में एक घर से मिले पति-पत्नी के दो शवों का अंतिम संस्कार शुक्रवार को महाकाल सेवा संस्थान एवं सुल्तान-ए-इंदौर संस्था के सदस्यों ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जूनी इंदौर मोक्ष धाम पर किया। इनके परिजनों ने दोनों के शव लेने से इंकार कर दिया था इसलिए पुलिस एवं नगर निगम की तमाम प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद संस्था के सदस्यों ने दोनों शवों को अलग-अलग चिताओं पर रखकर उन्हें अंतिम बिदाई दी।
संस्था महाकाल सेवा संस्थान के संयोजक अशोक गोयल, अध्यक्ष जयू जोशी, सुरेश मोरे, राजकुमार मेहता, अजय नागदा, विजयेंद्र यादव एवं संस्था सुल्तान-ए-इंदौर के अध्यक्ष करीम पठान, फिरोज खान, आदिल खान ने अपने सहयोगी बंधुओं के सहयोग से इन दोनों मृतकों के शवों को एमवाय से नगर निगम के सेवा वाहन से मोक्ष धाम पहुँचाया और वहां विद्वान पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी सदस्यों ने चिता को अग्नि प्रदान कर उनका अंतिम संस्कार किया। ये दोनों पति-पत्नी पिछले कई वर्षों से सेटेलाइट जंक्शन स्थित अपने मकान में रह रहे थे। पुलिस द्वारा की गई जांच से पता चला कि इनमें पति का नाम कन्हैयालाल बरनवाल (47 वर्ष) था और पत्नी का नाम स्मृति बताया गया। ये लोग मूलतः देवरिया (उ.प्र.) के रहने वाले थे और पति पीथमपुर स्थित किसी फार्मा कम्पनी में काम करने के बाद सेवानिवृत्त होकर रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार पति को लकवा हो गया था और आसपास के लोगों ने पुलिस को बताया कि पिछले करीब 10 दिनों से उन्होंने इस दंपत्ति को घर के बाहर नहीं देखा। जब घर से भयंकर बदबू आने लगी तब पड़ोस के लोगों ने पुलिस को सूचना दी तो पता चला कि पति की मृत्यु 10 दिन पहले हो चुकी थी और पत्नी की मृत्यु 3 दिन पहले। इस तरह पति की मौत के 7 दिनों तक पत्नी उनकी लाश के साथ घर में ही रही। पुलिस ने उनके देवरिया स्थित मूल निवास पर सम्पर्क किया तो कन्हैयालाल के चारों भाइयों ने उनके शव लेने तथा अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया, तब इन संस्थाओं के सहयोग से पुलिस ने उन्हें लावारिस शव करार देते हुए अंतिम संस्कार करवाया।
संस्था महाकाल सेवा संस्थान के अशोक गोयल ने बताया कि उनकी संस्था और सुल्तान-ए-इंदौर के सदस्य मिलकर वर्ष 1978 से अब तक 11,500 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। वहीं अनेक लोगों को बीमारी की स्थिति में अस्पताल भी भिजवाया है। वर्ष 2018 से अब तक संस्था ने 900 से अधिक मानसिक रोगियों को उनके घरों तक पहुँचाया और पिछले 10 वर्षों में 3600 लोगों का अस्पतालों में उपचार भी कराया है। संस्था द्वारा पिछले 40 वर्षों से नियमित सेवा कार्य किए जा रहे हैं।
