नए साल से पुराने वाहनों के कारोबारी 1 जनवरी, 2026 से बिना ‘प्राधिकार पत्र’ (डीलर ऑथोराइजेशन) के पुराने वाहनों का व्यापार नहीं कर सकेंगे । इंदौर के करीब 100 डीलर्स को इस नियम के अनुसार पंजीयन कराना होगा ।
प्राधिकार पत्र के नियम का सबसे बड़ा लाभ वाहन स्वामियों को गाड़ी बेचते समय मिलेगा केंद्रीय मोटरयान नियम के तहत ‘फॉर्म 29-सी’ भरा जाएगा। इस फॉर्म की जानकारी आरटीओ (RTO) को मिलते ही डीलर उस वाहन का ‘डीम्ड ओनर’ (माना गया स्वामी) बन जाएगा। इसका अर्थ यह है कि वाहन हैंडओवर होते ही पुराने मालिक की कानूनी जिम्मेदारी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। अब तक कई मामलों में गाड़ी बेचने के बाद भी दुर्घटना या अपराध की स्थिति में जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ जाती थी, जो अब नहीं होगा।
यह नियम पुराने वाहनों के डीलरों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नए वाहनों के शोरूम संचालक भी ‘एक्सचेंज’ में पुरानी गाड़ियां लेते हैं, तो उन्हें भी प्राधिकार पत्र लेना अनिवार्य होगा। डीलर महज 25 हजार रुपये शुल्क देकर एनआईसी (NIC) के माध्यम से पोर्टल पर अपना पंजीयन करा सकेंगे।आरटीओ से प्राप्त जानकारी के अनुसार , सभी डीलरों के लिए ऑथोराइजेशन लेना अनिवार्य है। इस बदलाव से खरीदारों को भी बड़ी राहत मिलेगी। अधिकृत डीलर से खरीदी गई गाड़ी का पूरा रिकॉर्ड परिवहन विभाग के पास रहेगा, जिससे फर्जी कागजात और चोरी की गाड़ियों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगेगी।
