बीतता वर्ष दर्दों की फ़ेहरिस्त में एक और दर्द ज़हर बनकर नल से जीवन में दे गया सिस्टम की लापरवाही से इस बार फिर कई परिवारों को आँसू का सहारा मिला यह बड़ा प्रश्न चिह्न है ट्रिपल इंजन सरकार और सरकारी सिस्टम पर जीवनदायनी का अमृत जहर कैसे हो गया? सहयता राशि खोए हुए अपनों का संबल नहीं दिला सकती सैकड़ो जिंदगी आज भी पेशोंपश में है कल का सूरज रोशनी लाएगा या नहीं ? एक बार फिर सरकारी मिशनरी फेल हुई है इस बार जहरीली शराब नहीं अमृत को ज़हर बनने दिया गया लोग चीखते रहे शिकायत करते रहे 311 पर कंप्लेंट करते रहे और मुख्यमंत्री के प्रभार वाले जिले का प्रशासन सौता रहा पार्षद जी ने साहब को अवगत कराया विपक्ष ने गंदा पानी बोतल में भरकर सदन में दिखाया पर निरंकुश अफ़सर शाही जीत गई और ज़िन्दगियाँ हार गई ।

स्वक्षता में नम्बर वन होने पर इठलाता शहर आज गंदे पानी के चलते अस्पतालों में ज़िंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है यदि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सुध नहीं लेते तो शायद प्रशासन जागता नहीं प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह आईसीयू में जा चुकी है तभी कभी मौत बनकर ट्रक दौड़ता है तो कभी चूहे जीवन को कुतर जाते है और कभी जहर बनकर कफ सिरप जिंदगी निगल जाता है आज सैकड़ो लोग अस्पताल में है और जिम्मेदार नींद में कैसे संभव है । रिपोर्ट आएगी — “अफसरों की नहीं, ड्रेनेज की गलती” कोई दोषी नहीं,सब बरी..
सिस्टम की कहानी कभी चार इंच की बारिश उखड़े रोड कटते पेड़ और बीआरटीएस जैसे मुद्दे विकास को मुंह चिढ़ाते दिखाई देते है है..भागीरथपुरा की घटना ने बता दिया देश के आम आदमी को पानी भी मौत दे सकता वो दिन खो गए जब टोटी में मुंह लगाकर पानी पी लिया करते थे.. अब तो नर्मदा मैय्या का पानी भी भ्रष्टाचार के पाइपों से बहकर पहुंचता है और ड्रेनेज का पानी इसलिए भी मिलने दिया जाता है ताकि सनद रहे कि ड्रेनेज लाइन है भागीरथपुरा में गंदे पानी से सैकड़ों अस्पतालों में है और कुछ स्वर्ग सिधार गए.. सिस्टम ने कहा ये मौतें हार्ट अटैक और लंबी बीमारियों के चलते हुई.. कोरोना ने सिस्टम को ऐसी मौतों को परिभाषित करने का अच्छा अभ्यास करवा दिया.. मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रथम नागरिक से लेकर सारे अफसरान चिंतित है.. प्रयोगशाला में थोकबंद नमूनों की नुमाइश है.. मशीनरी की ऐसी तात्कालिक सक्रियता के लिए शायद हादसों का इंतज़ार रहता है सफाई में नम्बर वन इंदौर पर यह बदनुमा दाग असहनीय और भयावह है । नए साल में प्रभु से प्रथना करे कि प्रशासनिक तंत्र संवेदनशील, चुस्त और दुरुस्त हो
ये दर्द का सफ़र है 2025 तक ही रहे ।
विजय दुबे
9977866588
