दस भट्टियों पर 40 रसोइये लगातार 72 घंटे तक तैयार करेंगे भक्तों के लिए लड्डू प्रसाद

इंदौर । खजराना गणेश मंदिर पर 6 से 8 जनवरी तक लगने वाले परंपरागत तिल चतुर्थी मेले की तैयारियां शुरू हो गई है। भक्त मंडल के अरविन्द बागड़ी द्वारा तिल चतुर्थी मेले के शुभारंभ पर 6 जनवरी को तिल गुड़ के सवा लाख लड्डुओं का भोग समर्पित किया जाएगा। शुक्रवार को मंदिर के पुजारी पं. अशोक भट्ट, पं. सुमित-पं. पुनीत भट्ट द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लड्डुओं के निर्माण का काम दस भट्टियों पर शुरू कर दिया गया है। भक्त मंडल द्वारा सवा लाख लड्डुओं के भोग के प्रसाद वितरण का शुभारंभ सुबह 10 बजे कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शिवम वर्मा और निगमायुक्त तथा मंदिर के प्रशासक दिलीप यादव द्वारा पूजा-अर्चना के साथ किया जाएगा।
भक्त मंडल के अरविंद बागड़ी एवं कैलाश पंच ने बताया कि शुक्रवार सुबह शहर के प्रसिद्ध रसोइए खेमजी महाराज की टीम के 40 रसोइयों ने सवा लाख लड्डुओं के निर्माण का काम शुरू कर दिया। लड्डू बनाने का काम 5 जनवरी की रात तक चलेगा। दस भट्टियों पर 40 रसोइये मिलकर लड्डुओं का निर्माण करेंगे। 6 जनवरी को सुबह कलेक्टर, निगम आयुक्त एवं अन्य अतिथि गणेशजी को सवा लाख लड्डुओं का भोग समर्पित करेंगे और भक्तों में प्रसाद वितरण का शुभारंभ भी करेंगे। लड्डू निर्माण के शुभारंभ अवसर पर मंदिर के महाप्रबंधक राकेश शर्मा, भक्त मंडल की ओर से अरविन्द बागड़ी, कैलाश पंच, वंशिका-यश गोयल, वरुण-नताशा बागड़ी, सुभाष नायक, सुरेश चौधरी, परी-पार्थ, मंदिर के प्रबंधक घनश्याम शुक्ला, पं. नर्मदा प्रसाद शास्त्री भी मौजूद थे। लड्डू निर्माण का यह काम लगातार 72 घंटे तक चलेगा। 7 जनवरी को गणेशजी को गोंद के लड्डुओं का भोग तथा 8 जनवरी को उड़द के लड्डुओं का भोग भी लगाया जाएगा। मेले का शुभारंभ कलेक्टर शिवम वर्मा एवं निगमायुक्त दिलीप यादव एवं अन्य अतिथियों द्वारा 6 जनवरी को सुबह 10 बजे ध्वजा पूजन के साथ किया जाएगा।
पं. जयदेव भट्ट ने बताया कि तिल चतुर्थी मेले के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक पुष्प एवं विद्युत सज्जा से श्रृंगारित किया जा रहा है। मंदिर तक पहुंचने वाले सभी मार्गों की मरम्मत एवं विद्युत व्यवस्था भी सुधारी जा रही है। मालवा का प्रख्यात मेला होने के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु इस मेले में आते हैं। मेले में पुष्प श्रृंगार सहित पूजा के विभिन्न आयोजन भी होंगे। मेले में दूर-दूर के दुकानदार भी आते हैं और मनोरंजन के सभी देशी साधन, चकरी, झूले आदि भी लगाए जाते हैं।
