सज्जन वर्मा चिंटू चौकसे सहित अन्य नेता गिरफ्तार… ”लोकतंत्र की हत्या हो गई…”
इंदौर

भागीरथपुरा में भाजपा-कांग्रेस के आमने-सामने आने के बाद माहौल गरमाया हुआ है और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया… इस बीच पुलिस को चिंटू चौकसे सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं को जबरदस्ती खींचकर भीड़ से बाहर करना पड़ा..!भागीरथपुरा में गरमाए माहौल के बीच पुलिस ने सज्जन वर्मा, चिंटू चौकसे सहित अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया… इस दौरान पुलिस की गाड़ी में ड्राइवर के पास बैठकर पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा बोले – हमें पीड़ितों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा… हम तो संवेदना व्यक्त करने जा रहे थे… उनकी मदद करने जा रहे थे… 16 लोगों की मौत के बाद भी कैलाश विजयवर्गीय को… उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए… आज लोकतंत्र की हत्या हो गई… उधर, कांग्रेस का यह भी कहना है कि यह विरोध पूरी तरह से प्रायोजित है… जितने भी विरोध करने वाले थे उनमें से एक भी पीड़ित या जनता की ओर से नहीं था… सब भाजपा के लोग थे..!
भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस ने जांच समिति बनाई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार दोपहर इलाके में पहुंचा। देखते ही देखते हंगामा, नारेबाजी और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। रहवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने वापस जाओ के नारे लगाए, तो वहीं काले झंडे भी कांग्रेस नेताओं को दिखाए गए, इसी बीच किसी ने कांग्रेसियों पर चप्पल भी फेंक दी। कांग्रेस नेताओं के पहुंचते ही भाजपा कार्यकर्ताओं और कुछ स्थानीय रहवासियों ने इसका तीखा विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते यहां जमकर हंगामा हो गया। काले झंडे लहराए गए और वापस जाओ जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
आमने-सामने हुए कार्यकर्ता
यहां स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही तय करने की मांग करते दिखे, तो दूसरी ओर भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक ड्रामा बताते हुए नारेबाजी करने लगे।
नारों ने गर्मा दिया माहौल
कैलाश जी शेर हैं और बाहरी लोग वापस जाओ जैसे नारों ने माहौल को और गरमा दिया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए घंटा पार्टी मुर्दाबाद के नारे लगाए और कहा कि सत्ताधारी दल जनता की मौतों पर पर्दा डालना चाहता है। इस दौरान कई स्थानीय लोग भी विरोध में शामिल हो गए, जिनका कहना था कि उन्हें नेताओं की बयानबाजी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
हंगामे के दौरान कुछ देर के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। मौके पर तैनात पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और लगातार समझाइश देती रही। हालात की नजाकत को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया गया, लेकिन इलाके में तनाव देर तक बना रहा।
मामले ने लिया राजनीतिक रूप
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने पहले ही प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले ने खुलकर राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों की जान गई, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस त्रासदी को मुद्दा बनाकर राजनीतिक जमीन तलाश रही है और इससे क्षेत्र की शांति भंग हो रही है।
राजनीतिक टकराव का मुद्दा
फिलहाल भागीरथपुरा में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन यह साफ है कि दूषित पानी का यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
