आकाश से भी अधिक ऊंचाई और समुद्र से भी
ज्यादा गहराई रामकथा के भावों में : पं. भार्गव

इंदौर। रामकथा भारतभूमि का प्राणतत्व है। रामचरित मानस का प्रत्येक अक्षर मनुष्य को निष्पाप बनाने वाला है। प्रभु राम ने मानव के साथ-साथ वन्यप्राणियों को भी जीवन जीने की कला सिखाई है। राम सत्य, धर्म, प्रेम, करूणा और पराक्रम के पर्याय एवं प्रतीक हैं। विश्व की समस्याओं का समाधान शस्त्र से नहीं, भारत के शास्त्रों से ही संभव होगा, लेकिन वर्तमान हालातों में शास्त्रों के साथ शस्त्रों पर भी ध्यान देना होगा। आकाश से भी अधिक ऊंचाई और समुद्र से भी ज्यादा गहराई रामकथा के भावों में है।
बर्फानी धाम के पीछे स्थित गणेश नगर में माता केशरबाई रघुवंशी धर्मशाला परिसर के शिव-हनुमान मंदिर की साक्षी में चल रही रामकथा में बुधवार को प्रख्यात मानस मर्मज्ञ पं. मनोज भार्गव ने प्रभु श्रीराम के वनवास काल के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में आयोजन समिति के प्रमुख तुलसीराम रघुवंशी एवं संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी के साथ अ.भा. उपभोक्ता कांग्रेस संगठन के अध्यक्ष आरके शुक्ला, मोहन सिंह रघुवंशी, गजेन्द्र सिंह चंदेल, सुरेन्द्र पटेल, वत्सल दुबे, केपी सिंह, महेश अग्रवाल, दुल्हेसिंह राठौर, कैलाश पटेल, अशोक हांडिया, नारायण सिंह रघुवंशी एवं राजेंद्र सिंह रघुवंशी सहित अनेक विशिष्टजनों ने व्यास पीठ एवं रामचरितमानस का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी प्रवीण सिंह पंवार, बनेसिंह तंवर, श्रीराम यादव, दिलीप सिंह सोलंकी आदि ने की। संयोजक रेवतसिंह रघुवंशी के अनुसार कथा में गुरुवार 8 जनवरी को श्रीराम–सुग्रीव मित्रता, 9 को रावण वध एवं रामराज्याभिषेक प्रसंगों की संगीतमय कथा के साथ विश्राम होगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक होगी।
पं. भार्गव ने कहा कि प्रभु ने रावण को मारने के लिए किसी अस्त्र-शस्त्र का नहीं बल्कि अपने दृढ़संकल्प का उपयोग किया। मानस की कथा मनुष्य को निर्भयता प्रदान करती है। महापुरूष वही होते हैं, जो स्वयं की समस्या को छोडकर राष्ट्र की समस्याओं के निवारण का चिंतन करते हैं। जीवन में ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे राम नाम का चिंतन छूट जाए और हमारे भजन भक्ति बिगड़ जाएं। हम सबके जीवन में भी लक्ष्मण रेखा का पालन अनिवार्य होना चाहिए। राम और हनुमान हमारे देश के अदभुत व्यक्तित्व हैं। हनुमान भक्त भी हैं और भगवान भी हैं। शबरी के जूठे बैर भगवान के प्रति भक्त की भावना का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।
