झलारिया के रूचि लाइफ स्केप स्थित अखंड प्रणव वेदांत आश्रम पर सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

इंदौर। भागवत भगवान कृष्ण का वांगमय अवतार है। यह कथा केवल कथा नहीं जीवन की व्यथा को दूर करने का सबसे सरल माध्यम है। दुनिया में एकमात्र भागवत ही ऐसी रचना है जो नित्य नूतन अनुभूति प्रदान करती है। हजारों बार सुनने के बाद भी भागवत हर बार नूतन आनंद देती है। भक्त और भगवान को जोडने का काम भागवत रूपी सेतु से ही संभव है। भागवत केवल कथा नहीं, सदगुणों का खजाना है जिसमें जितना गहरे उतरेंगे, उतना ही ज्यादा प्राप्त करेंगे।
ये दिव्य विचार हैं अखंड प्रणव वेदांत आश्रम, झलारिया के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने झलारिया बायपास स्थित रूचि लाइफ स्केप पर आज से प्रारंभ भागवत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किए। इसके पूर्व झलारिया एवं आसपास के क्षेत्रों में भागवतजी की शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें भजन एवं गरबा मंडलियों के साथ मंगल कलशधारी महिलाएं भी शामिल हुईं। कथा स्थल अखंड प्रणव वेदांत आश्रम पहुँचने पर मुख्य यजमान समाजसेवी सुरेश-मृदुला शाहरा, श्रीमती कल्पना भाटिया एवं अन्य श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन किया। महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती यहाँ मंगलवार 13 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 3 से सांय 7 बजे तक भागवत कथामृत की वर्षा करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कथा में गुरुवार 8 जनवरी को कपिल देवहुति संवाद, 9 को भक्त प्रह्लाद एवं ध्रुव चरित्र, 10 को कृष्ण जन्मोत्सव, 11 को बाल लीला एवं गोवर्धन पूजन, 12 को रूक्मणी स्वयंवर तथा 13 जनवरी को सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष के साथ कथा का विश्राम होगा। कथा प्रसंगानुसार उत्सव भी मनाए जाएंगे। बुधवार 14 जनवरी को दोपहर 2 से 5 बजे तक हवन एवं पूर्णाहुति के साथ समापन होगा। आयोजन में बड़ी संख्या में शहर एवं अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालु भागीदार बन रहे हैं।
महामंडलेश्वर जी ने कहा कि भागवत कथा जीवन के परम लक्ष्य, भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य की ओर ले जाती है जिससे मन का शुद्धिकरण होता है। हमारे ज्ञान में दृढ़ता होना चाहिए। ज्ञान केवल सूचना नहीं है। ज्ञान वह निश्चय है जो बार-बार के अनुभव से सुदृढ़ और अडिग बन जाता है। हमारे ज्ञान में संशय नहीं होना चाहिए और हमारे श्रवण में प्रमाद भी नहीं होना चाहिए। यह सब भागवत के श्रवण से ही संभव होगा। याद रखें कि जहां भागवत कथा होती है, वह स्थल तीर्थस्थल बन जाता है।
