अरणि मंथन के साथ शुरू होगी स्वाहाकार की मंगल ध्वनि – आसपास के 40 शहरों और कस्बों के श्र्द्धालुओं का आगमन

इंदौर ।
बंगाली चौराहा स्थित मैदान पर गुरुवार से प्रारंभ हुए विराट लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ सुबह यज्ञ स्थल से खजराना गणेश मंदिर तक भव्य और दिव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। देश के जाने-माने संतों, विद्वानों एवं महंतों के सानिध्य में निकली कलश यात्रा में हजारों मातृशक्ति ने मस्तक पर देश की पवित्र नदियों के जल से भरे कलश धारण कर पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ नाचते गाते हुए यज्ञ देवता के जयघोष से समूचे यात्रा मार्ग को लंबे समय तक गुंजायमान बनाए रखा। इसके पूर्व सुबह यज्ञ स्थल पर यजमानों के लिए क्षोरकर्म और दशविध स्नान सहित शुद्धिकरण की करीब 3 घंटे चली प्रक्रिया भी विद्वानों के सानिध्य में हुई। यज्ञ का यह वृहद अनुष्ठान प्रख्यात संत ब्रह्मलीन देवराहा बाबा के परम शिष्य महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज (आगरोद) के सानिध्य में हो रहा है, जिसमें शुक्रवार से सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक काशी के प्रख्यात यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे और उनके साथ आए सात अन्य विद्वान याज्ञिक अनुष्ठान संपन्न कराएँगे। शुक्रवार को सुबह 9 बजे अरणि मंथन के साथ स्वाहाकार की मंगल ध्वनि भी प्रारंभ हो जाएगी। यहाँ करीब 8 हजार वर्गफुट क्षेत्र में यज्ञशाला के साथ परिक्रमा मार्ग भी बनाया गया है।
आयोजन समिति के प्रमुख देवव्रत पाटीदार ने बताया कि कलश यात्रा में महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज के साथ निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदास महाराज, महामंडलेश्वर भरतदास महाराज, फौजी बाबा रामकृपाल दास, बद्रीनाथ धाम से महंत गोविन्ददास, हरिद्वार से महंत रामदास, वृंदावन से मनमोहन दास, महंत रघुनाथ दास, महंत विजय दास सहित बड़ी संख्या में मालवांचल के अनेक प्रमुख धर्मस्थलों के संत-महंत शामिल हुए। यज्ञ स्थल से प्रारंभ कलश यात्रा के दौरान मार्ग में अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा के बीच यजमानों एवं मातृशक्ति तथा संतों विद्वानों का स्वागत भी किया गया। खजराना गणेश पहुंचकर कलश यात्रा में शामिल मातृशक्ति ने संतो विद्वानों के सानिध्य में खजराना गणेश से सर्वजन हिताय एवं सर्वजन सुखाय की कामना से हो रहे इस दिव्य अनुष्ठान की सफलता और सार्थकता के लिए प्रार्थना की। कलश यात्रा के समापन अवसर पर यज्ञ स्थल पर आयोजित धर्मसभा में देशभर से आए विद्वानों ने लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की महत्ता बताते हुए कहा कि 51 कुण्डीय इस महायज्ञ का आयोजन शहर में करीब 20 वर्षों के लंबे अन्तराल से हो रहा है जिसमें मालवांचल के अनेक जिलों के श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। महायज्ञ में गाय के शुद्ध घी, गोबर के कंडों, पलाश, चन्दन, वट, पीपल एवं आम की लकड़ी सहित 100 से अधिक तरह की औषधियों, वनस्पति एवं जड़ी-बूटी से निर्मित समिधा एवं तिल, जौ, चावल, खांड, कमलगट्टा, सफ़ेद एवं लाल चंदन, बेल्वपत्र, भोजपत्र, गूगल आदि का प्रयोग होगा। 20 वर्ष पूर्व इस तरह का महायज्ञ दशहरा मैदान पर देवराहा बाबा की प्रेरणा से आयोजित हुआ था। उसके बाद अब यह अनुष्ठान हो रहा है। यज्ञ में अरणि मंथन की प्रक्रिया शुक्रवार 9 जनवरी को सुबह 9 बजे काशी के विद्वानों के निर्देशन में होगी।
भक्तों से दाल चावल लाने का आग्रह – महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज एवं यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे ने बताया कि यज्ञ में प्रतिदिन करीब 2.50 लाख आहुतियाँ 151 यजमानों द्वारा प्रदान की जाएंगी। यज्ञ में शामिल होने वाले यजमान परिवारों, परिक्रमा करने वालों और यज्ञ की व्यवस्था में प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से भागीदार बनने और सहयोग करने वालों के कल्याण के उद्देश्य से किए जा रहे इस महायज्ञ की पूर्णाहुति 14 जनवरी मकर संक्रांति को अपराह्न 4 बजे होगी। उसी दिन यज्ञ स्थल पर विशाल भंडारा भी होगा जिसमें प्रतिदिन अपने साथ घरों से एक पाव मूंग की दाल और एक पाव चावल से निर्मित खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया जाएगा। महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज ने यज्ञ में आने वाले सभी भक्तों से आग्रह किया है कि वे अपने साथ दाल एवं चावल लेकर आएं और यज्ञ स्थल पर रखे पात्र में समर्पित करें। इसी दाल चावल से खिचड़ी प्रसाद बनाकर वितरण किया जाएगा। इसकी शुरुआत गुरुवार से हो गई जब महायज्ञ के पहले दिन ही करीब 10 क्विंटल दाल चावल का संग्रह जमा हो गया। यह प्रक्रिया 13 जनवरी तक चलेगी।
यज्ञ शाला में ब्रह्मा और प्रधान कुंड सहित 51 कुंड बनाए गए हैं जिन पर 151 यजमानों ने आज पूजन संपन्न किया। यज्ञ स्थल पर 5 बीघा क्षेत्र में यज्ञशाला, परिक्रमा मार्ग, कार्यालय, संत निवास, अतिथि निवास आदि का निर्माण किया गया है। यज्ञ स्थल पर प्रवेश निशुल्क रहेगा। 9 जनवरी से परिक्रमा का क्रम शुरू हो जाएगा। यज्ञ में भागीदारी के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला निरंतर जारी है और करीब 40 गांवों के 3 हजार से अधिक श्रद्धालु इंदौर पहुँच गए हैं।
