
इंदौर। शहर में पहली बार हो रहे सेंट्रल इंडिया हॉर्स शो का आयोजन गांधीनगर ग्राउंड पर देवी अहिल्या हॉर्स सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित किया गया, इसमें मध्यप्रदेश, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित 7 राज्यों के घोड़े और घोड़ियां उनके मालिक लेकर आए। इन घोड़ों और घोड़ियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। आयोजन में दूसरे दिन मारवाड़ी टीथ फिली प्रतियोगिता में जहां राजस्थान की घोड़ी दुर्गाभारत ने प्रथम स्थान पाया, वहीं मारवाड़ी कोल्ट टीथ प्रतियोगिता में गुजरात के घोड़ा बाहुबली नंबर वन पर आया। आयोजक पवन सिंह चावड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन में दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में मप्र के कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, मितेश रावल, भाजपा जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा,विशाल पटेल, संजय शुक्ला, निशांत खरे , जीतू जिराती, श्रीमती माला ठाकुर, महेंद्र सिंह सोनगरा, जीवन सिंह शेरपुर, दीपक जैन,हवनसिंह चावड़ा, शुभमसिंह चावड़ा, अंकित सिंह चौहान , हिम्मत पूरी, अनुराग राठौर, रवि सिंह चावड़ा, मौजूद थे ।
यह रहे विजयी
दूसरे दिन आयोजित की गई मारवाड़ी मिल्की टीथ फिली प्रतियोगिता में प्रथम राजस्थान के सिकंदर की दुर्गा भारत, द्वितीय अहमदाबाद गुजरात की रूक्शमणीऔर तीसरे स्थान पर राजस्थान की पारसमणी रही। इसी प्रकार मारवाड़ी कोल्ट टीथ प्रतियोगिता में गुजरात के तेजस पटेल के बाहुबली प्रथम, खजराना इंदौर के बब्बू का के जान द्वितीय तथा रूपेश पाटीदार रंगवासा इंदौर का पोरस तृतीय रहा।
नृत्य में राजस्थान के राणा ने किया अचंभित
रिंग में नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित किए, जिसमें राजस्थान के राणा नामक घोड़े ने एक से एक करतब दिखाकर सभी को अचंभित कर दिया।
बनाया स्टेडियम और गैलरी
श्री चावड़ा के मुताबिक आयोजन के लिए एक छोटा स्टेडियम तैयार किया गया, जिसमें दर्शकों के लिए गैलरी और बीच में प्रतियोगिता रिंग बनाई गई। रिंग में केवल चयनित घोड़े और उनके मालिकों को ही प्रवेश दिया गया।
घोड़े के संरक्षण के प्रति जागरूकता उद्देश्य

आयोजक पवन सिंह चावड़ा ने बताया कि इस दो दिनी शो में देश के 7 राज्यों से 225 से अधिक मारवाड़ी (अलग-अलग रंगों के) और नूकरा (स्टेलियन ) नस्ल के घोड़े शामिल हुए हैं। घोड़ों की शान, चाल, बनावट और ट्रेनिंग को लेकर पहले दिन अलग-अलग कैटेगरी की कॉम्प्टिशन हुई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आयोजन का उद्देश्य भारतीय घुड़सवारी संस्कृति को बढ़ावा देना और पारंपरिक घोड़ा नस्लों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। उम्मीद है कि यह हॉर्स शो हर साल होकर इंदौर को अश्व खेलों के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।
बड़ी संख्या में पहुंचे अश्वप्रेमी
हार्स शो में दूसरी दिन भी बड़ी संख्या में अश्वप्रेमी दिखाई दिए जो रिंग के चारों ओर मौजूद थे। कई घोड़े बच्चे प्रतियोगिता में शामिल हुए, कई घोड़ों की लाखों से लेकर करोड़ों में बोली लगी, लेकिन इनके अश्वप्रेमी मालिकों ने इन्हें देने से इनकार कर दिया।
