
बंगाली चौराहा पर लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति पर उमड़ा भक्तों का सैलाब- बच्चों को टीवी एवं मोबाइल के संयमित उपयोग के लिए प्रेरित करने, पूजा घरों में गीता एवं रामायण रखने, परिवारजनों के साथ हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करने, घर में सबके साथ बैठकर भोजन करने और संयुक्त परिवार को बढ़ावा देने जैसे संकल्प लिए गए
इंदौर ।
बंगाली चौराहा स्थित मैदान पर गत 8 जनवरी से चल रहे विराट लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर बुधवार को करीब 50 हजार श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा का पुण्यलाभ उठाया, वहीं यज्ञ के सूत्रधार महंत कृष्णगोपाल दास महाराज एवं काशी से आए यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे सहित देश के करीब 35 संतों, महंतों और विद्वानों की मौजूदगी में सनातन धर्म एवं संस्कृति को सुदृढ़ बनाने के लिए पांच संकल्प भी व्यक्त किए। इनमें अपने-अपने पूजा घरों में गीता एवं रामायण जैसे धर्मग्रन्थ रखकर बच्चों को उनका स्वाध्याय कराने, बच्चों को टीवी एवं मोबाइल के संयमित उपयोग के लिए प्रेरित करने, सप्ताह में एक या दो बार परिवार के सदस्यों के साथ हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करने, घर के सभी सदस्यों के साथ बैठकर भोजन करने और संयुक्त परिवार की व्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे संकल्प शामिल हैं। बुधवार को जैसे ही यज्ञ शाला में श्रीसूक्त की 7.5 लाख वीं और पुरुषसूक्त की भी 7.5 लाख वीं आहुति संपन्न हुई, समूची यज्ञ शाला और यज्ञ स्थल यज्ञ देवता एवं लक्ष्मीनारायण के जयघोष से गूंज उठे। करीब 50 हजार भक्तों ने यज्ञ स्थल पर भोजन प्रसादी का पुण्य लाभ भी उठाया। प्रसाद वितरण के लिए 6 पानी के टैंकर, 3 ट्रेक्टर-ट्राली, 6 ऑटो रिक्शा और करीब 250 कार्यकर्ताओं की मदद ली गई। रात 11 बजे तक भी अखंड भंडारा चलता रहा।
आयोजन समिति के देवव्रत राम कलसंग्रह एवं अलकेश सोलिया ने बताया कि पंचमुखी धाम आगरोद के अधिष्ठाता महंत कृष्णगोपाल दास महाराज के साथ द्वारकाधीश मंदिर बनारस के आचार्य परमानन्द महाराज, उज्जैन के महंत सियाराम दास महाराज एवं रामअवध दास महाराज, बुरहानपुर के महामंडलेश्वर स्वामी रामदास महाराज, हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत गोविंददास, बद्रीनाथ धाम से महंत गोविन्ददास, वृंदावन से आए मनमोहन दास महाराज, विरक्त साधु समाज मंडल के अध्यक्ष तेरा भाई त्यागी आश्रम के महामंडलेश्वर रामबालक दास रामायणी, निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदास महाराज, महंत भरतदास महाराज, फौजी बाबा रामकृपाल दास, हरिद्वार के महंत रामदास, महंत रघुनाथ दास, महंत विजय दास, वृंदावन के तपोनिष्ठ संत महंत सुखराम दास महाराज सहित करीब 35 संत धर्म सभा के मंच पर मौजूद रहे जिन्होंने एक स्वर से सनातन धर्म एवं हिंदू संस्कृति को और अधिक संगठित तथा सुदृढ़ बनाने के साथ ही अपनी कमजोरियों को भी रेखांकित किया। संतों ने महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज के आह्वान पर सभी यजमान युगलों एवं यज्ञ स्थल पर मौजूद 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को उक्त संकल्प दिलाते हुए आह्वान किया कि वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहे। उन्होंने लक्ष्मीनारायण महायज्ञ से प्राप्त होने वाली धनराशि का एक हिस्सा धर्म युद्ध में समर्पित योद्धाओं और उनके परिजनों को देने का भी संकल्प व्यक्त किया। समापन अवसर पर करीब 1100 भक्तों को अभिमंत्रित श्रीयंत्र का भी वितरण किया गया। पूर्णाहुति के अवसर पर आरएसएस के वरिष्ठ विनीत नवाथे, विनय पिंगले, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, पार्षद प्रणव मंडल, दिनेश सोनगरा, राजेश उदावत, पुष्पेन्द्र पाटीदार सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
50 हजार भक्तों को ऐसे परोसा भोजन महाप्रसाद – भोजन व्यवस्था प्रभारी नानूराम कुमावत एवं बलराम पाटीदार ने बताया कि महायज्ञ में बुधवार को करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई थी। भोजन निर्माण में 22 क्विंटल आटा, 40 क्विंटल आलू सहित अन्य सब्जी तथा 30 क्विंटल नुक्ती प्रसाद का निर्माण किया गया था। इसके लिए यज्ञ स्थल पर प्रतिघंटे 6 हजार लोगों के लिए भोजन वितरण में 6 ऑटो रिक्शा, 3 ट्रेक्टर ट्राली तथा 250 कार्यकर्ताओं की सेवाएँ ली गई। पानी के लिए 6 टैंकर और 3 स्थायी पेय जल केंद्र बनाए गए थे। 50 हजार पत्तलों की व्यवस्था की गई। भोजन में पूड़ी, सब्जी, रामभाजी एवं नुक्ती का निर्माण मंगलवार रात से ही शुरू कर दिया गया था। बंगाली चौराहे से खजराना जाने वाली सर्विस रोड पर भी भोजन व्यवस्था की गई जबकि यज्ञ स्थल पर टेबलों पर बफेट व्यवस्था भी रखी गई थी। शाम 5 बजे से शुरू हुई भोजन व्यवस्था रात 11 बजे तक लगातार चलती रही।
