
जूनी इंदौर मुक्ति धाम पर चल रही संगीतमय भागवत कथा – 30 जनवरी को मोक्ष धाम पर जमा अस्थियों का होगा विसर्जन
इंदौर
संसार के भौतिक संसाधनों की आपाधापी में मनुष्य भटक रहा है। परिवार बिखर रहे हैं, रिश्तों में दरारें आ रही हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि हम संस्कारों और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। हमारी नई पौध को अब शिक्षा के साथ संस्कारों की भी जरूरत है जो भागवत, रामायण और गीता जैसे दिव्य धर्मग्रंथों से ही प्राप्त हो सकते है। रामायण जीवन की और भागवत मोक्ष की कथा है।
जूनी इंदौर मुक्ति धाम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में भागवताचार्य पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने शनिवार को उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। आयोजन समिति के संयोजक अशोक सारडा एवं राजेश जोशी ने बताया कि कथा के दौरान जूनी इंदौर मोक्ष धाम परिसर स्थित महामृत्युंजय मंदिर में पं. राजेश तिवारी एवं अन्य विद्वानों द्वारा भागवत का मूल पारायण भी किया जा रहा है। कथा शुभारम्भ के पूर्व समाजसेवी लालचंद खटोड, रामेश्वर पटेल कुमावत, हीरालाल गोयल, प्रमोद खटोड, राहुल सोनकर, सुरेश राठोर आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी लक्ष्मण माहेश्वरी, रामनिवास भराणी, अनिल राठोर, ओमप्रकाश सोनकर एवं ओमप्रकाश राठोर सहित सैकड़ों भक्तों ने की। अनेक श्रद्धालु महामृत्युंजय मंदिर में बैठकर पूजा अर्चना भी कर रहे हैं। संगीतमय कथा 29 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक होगी। 30 जनवरी को मोक्ष धाम पर रखी हुई दिवंगतों की अस्थियों का शास्त्रोक्त विधि से विसर्जन कर दिया जाएगा, यदि दिवंगतों के परिजन इन अस्थियों को नहीं ले जाएँगे तो। समिति की ओर से दिवंगतों के परिजनों से आग्रह किया गया है कि वे अपने प्रियजनों, स्वजनों की अस्थियाँ 30 जनवरी के पहले मोक्ष धाम से ले जाएँ।
पं. श्याम सुंदर शास्त्री ने कहा कि जीवन की महाभारत जीतना है तो अर्जुन की तरह हमे भी अपने जीवनरथ रूपी गाड़ी की चाबी श्रीकृष्ण के हाथों में सौंप देना चाहिए। कलियुग में भागवत जैसी साक्षात भगवान की वाणी का श्रवण मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। भागवत भारत भूमि का विलक्षण ग्रंथ है, जिसे हजारों बार सुनने के बाद भी भक्ति की प्यास खत्म नहीं होती। रामायण जीवन जीने और भागवत मृत्यु को मोक्ष में बदलने की कथा है। भागवत और रामायण भारतभूमि की अनमोल धरोहर हैं, जो युगों-युगों तक हमारी प्रेरणा एवं ऊर्जा के केंद्र बने रहेंगे।
