
इंदौर
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर जब प्रकृति स्वयं पीले रंग की चूनर ओढ़े मुस्कुरा रही थी, तब सृष्टि कला कुंज कला संस्थान के परिसर में कला, साहित्य और भारतीय परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार को वासंती परिवेश में आयोजित एक दिवसीय कला पर्व ने मानो कला प्रेमियों को रंगों की दुनिया में आमंत्रित कर लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ, ललित कला की साधना की। प्रदेश के वरिष्ठ एवं प्रख्यात कलाकारों ने खुले परिसर में चित्र कार्यशाला के माध्यम से सृजन करते हुए कला को जीवंत रूप दिया। ब्रश की हर रेखा में ऋतुराज बसंत की खुशबू और मिट्टी की हर आकृति में परंपरा की आत्मा झलक रही थी।
संस्था की संस्थापक एवं वरिष्ठ चित्रकार वंदिता श्रीवास्तव के अनुसार इस वर्ष कला पर्व का विषय “मेरा आंगन” रखा गया था, जिसमें लगभग 50 कलाकारों ने अपने-अपने भावों, स्मृतियों और सांस्कृतिक अनुभवों को रंगों में ढालकर प्रस्तुत किया। इसी अनुरूप परिसर को विशेष रूप से वासंती शैली में सजाया गया, जहाँ पीले पुष्प, लोक सजावट और प्राकृतिक तत्वों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। सुधा स्टूडियो, प्रगति पार्क, बड़िया कीमा, बिचौली मर्दाना स्थित परिसर में कलाकारों द्वारा रचित कृतियों को प्रदर्शनी के रूप में सजाया गया, जिसमें शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के नामी कलाकारों की चुनिंदा कलाकृतियाँ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रदर्शनी में चित्रकला के साथ-साथ मूर्तिकला के भी सुंदर और सजीव उदाहरण देखने को मिले।
इस उत्सव में कैनवास पर अनुराग जाड़िया, एच एल साकवार, गौरव कुलश्रेष्ठ और पंकज खरे ने काष्ठ कला का प्रदर्शन करते हुए सुंदर कलाकृतियों का निर्माण किया। इसी तरह बृजमोहन आर्य, सुषमा श्रीवास्तव, प्रवीण खरे, प्रदीप अहीरवाल, तृप्ति गुप्ता, उमेंद्र वर्मा, गौरव, रमेश खेर, आलोक वर्मा, मधु वर्मा, हरेंद्र शाह, सुषमा जैन, ऋतिका जैन और रूचि अग्रवाल ने भी अपनी ऋतुराज वसंत पर उमड़ी भावनाओं को साकार रूप देते हुए कलाकृतिया निर्मित की। यह कला पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, लोक परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति का ऐसा उत्सव था, जहाँ बसंत सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि संवेदना बनकर हर कलाकार की कृति में उतर आया।
