साधुमार्गी जैन समता संघ द्वारा विन्ध्याचल नगर स्थानक पर हुई प्रेरक स्पर्धा, 22 को महिलाओं के लिए भी
इंदौर साधुमार्गी जैन समता संघ के तत्वावधान में विन्ध्याचल नगर स्थानक में चल रहे चातुर्मासिक अनुष्ठान में “जैन सिद्धांत बत्तीसी” स्पर्धा का आयोजन किया गया। जैन दर्शन के बत्तीस आगमो का सार इस बत्तीसी में शामिल किया गया है जिसके अध्ययन एवं कंठस्थ करने से सम्पूर्ण जैन दर्शन को समझने का मार्गदर्शन मिलता है।
साधुमार्गी जैन समता संघ के अध्यक्ष पारस बोहरा एवं मीडिया प्रभारी मनीष बोहरा ने बताया कि स्पर्धा में 66 प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया जिनमें 8 वर्षीय बालक शौर्य चोपड़ा से लेकर 80 वर्षीय समाजसेवी रतनलाल खिन्दावत भी शामिल हुए। स्पर्धा के लिए कुल 22 टीमों का गठन किया गया था जिनमें प्रत्येक में 3 सदस्य शामिल किए गए। चूँकि स्पर्धा की तैयारियां पिछले कई दिनों से चल रही थी इसलिए इस ज्ञान साधना में प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से अपनी भागीदारी दर्ज कराई। शुभारंभ जय-जयकार और रामगुरु की जयघोष के बीच हुआ तो समूचा स्थानक भवन गुंजायमान हो उठा। सभी टीमों ने क्रम से एक के बाद एक अपनी प्रस्तुतियां देकर स्मरण शक्ति और ज्ञान का शानदार प्रदर्शन किया। निर्णायक मंडल द्वारा घोषित नतीजों के अनुसार प्रथम पुरस्कार तेजकुमार तांतेड, अशोक गाँधी एवं संदीप आंचलिया की टीम को मिला जबकि द्वितीय विजेता लव आंचलिया, प्रफुल्ल आंचलिया एवं सौरभ आंचलिया की टीम रही। पूरी स्पर्धा शासन दीपक पद्ममुनि म.सा., निर्वाण मुनि म.सा. एवं रामदृश्य मुनि म.सा. के सानिध्य में सम्पन्न हुई। स्पर्धा में जैन दर्शन के अध्ययन, संस्मरण और अभ्यास के प्रति हर आयुवर्ग के प्रतिभागियों की दिलचस्पी से यह तथ्य सामने आया कि यदि उचित मार्गदर्शन और प्रेरणा मिले तो धर्म ज्ञान की ज्योति प्रत्येक आयु वर्ग के जीवन में रोशन हो सकती है।
इस अवसर पर प.पू. पद्म मुनि म.सा. ने कहा कि जैन सिद्धांत बत्तीसी केवल एक स्पर्धा नहीं बल्कि जैन दर्शन को समझने, आत्मसात करने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। ऐसे आयोजन हमारी नई पीढ़ी में नई चेतना जागृत कर समाज में अध्ययन, संस्कार, एकता और आध्यात्मिक जागरूकता को सुदृढ़ बनाते हैं। अब 22 अक्टूबर को विन्ध्याचल नगर स्थानक में महिलाओं के लिए भी इस स्पर्धा का आयोजन होगा जिसमें करीब 90 महिला प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है।
