हजारों भक्तों ने किए मातारानी के दर्शन
मंदिर के तृतीय स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में समर्पित किए 56 भोग, नवचंडी पाठ और महाआरती में भी उमड़ा भक्तों का सैलाब

इंदौर। श्री अन्नपूर्णा आश्रम ट्रस्ट, मंदिर संचालन समिति एवं भक्त मंडल के संयुक्त तत्वावधान में शहर के प्रमुख आस्था केंद्र अन्नपूर्णा आश्रम के तृतीय स्थापना महोत्सव के समापन दिवस पर शनिवार को 25 हजार से अधिक भक्तों ने मंदिर पहुंचकर दर्शन पूजन कर महाप्रसादी का भी पुण्यलाभ उठाया। आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शनिवार को सुबह माँ अन्नपूर्णा, माँ काली एवं माँ सरस्वती को 56 भोग समर्पित किए गए। रात्रि ने समूचा मंदिर परिसर मातारानी के जयघोष के बीच असंख्य दीपों से जगमगा उठा।
अल सुबह माँ के अभिषेक एवं सहस्त्रार्चन के बाद नवचंडी पाठ से समूचा मंदिर परिसर गूंजायमान बना रहा। भक्तों ने कतारबद्ध होकर माता रानी के जयकारे लगाते हुए दर्शन पूजन किए। संध्या को मंदिर पर दीपोत्सव भी मनाया गया जिससे मंदिर की छटा और अधिक मनोहारी बन गई। समूचा गर्भगृह एवं परिसर असंख्य दीपों से जगमगा उठा। मंदिर के न्यासी मंडल के प्रमुख विनोद अग्रवाल, टीकमचंद गर्ग, दिनेश मित्तल, पवन सिंघानिया, श्याम सिंघल, सत्यनारायण शर्मा एवं सुनील गुप्ता ने बताया कि नवश्रृंगारित अन्नपूर्णा लोक पर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में बीती रात हनुमत ढोल पथक दल के सदस्यों ने अपनी प्रस्तुतियों से अद्भुत समां बांधा वहीं भजन गायक गन्नू महाराज और उनके साथियों ने भी अपने भजनों से माँ के दरबार में भक्ति और भावना से लबरेज वातावरण बनाए रखा तथा देर रात तक हजारों भक्तों को भक्ति के सम्मोहन में बांधे रखा।
शनिवार को सुबह अभिषेक एवं सहस्त्रार्चन के बाद नवचंडी पाठ, मातारानी को 56 भोग समर्पण सहित विभिन्न अनुष्ठानों में आश्रम के संचालक स्वामी जयेंद्रानंद गिरि एवं न्यासी मंडल के सदस्यों ने पूरे समय भक्तों का मार्गदर्शन किया। महामंडलेश्वर स्वामी विश्वैश्वारनंद गिरि ने भक्तों को प्रसाद वितरण का शुभारंभ किया। संध्या को महाआरती में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। शहर के अनेक विशिष्टजन एवं अन्य धर्म स्थलों के संत विद्वान एवं पुजारियों ने भी मंदिर पहुंचकर महाआरती में शामिल होकर मातारानी के दर्शन किए। उधर, संध्या से ही महाप्रसादी का क्रम शुरू हो गया था। भोजन शाला में टेबल कुर्सी लगाकर भक्तों को व्यंजन परोसे गए। करीब 7 हजार भक्तों ने देर रात तक महाप्रसादी का पुण्य लाभ उठाया।
