कनाडिया रोड स्थित केबीसी सभागृह में चल रहे दिव्य गीता सत्संग के दूसरे दिन प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने दिए प्रेरक आशीर्वचन
इंदौर

गीता हमारे जीवन का ऐसा दर्पण है जो हमें अपने अंदर की कमियों, मन की कमजोरियों, विचलन, अशांति और अस्थिरता की ओर इंगित करता है। गीता के दर्पण में मनुष्य को सबकुछ दिखाई देता है कि अपने जीवन को कैसे धैर्यवान और स्थिर रखें। अशांत मन को पूरी तरह चिंता मुक्त रखने, परमार्थ से पुरुषार्थ, निराशा से आशा और अंदर की सोच को उदार बनाने वाला एक मात्र ग्रन्थ गीता ही है। गीता कर्तव्य बोध कराने वाला दिव्य ग्रन्थ है। मन को स्थिर बनाए रखने, मन की वृत्तियों पर विजय पाने, अपने स्वाभिमान की रक्षा करने का अनुपम ग्रन्थ है गीता। मोह और प्रेम के अंतर को समझ लेंगे तो गीता को केवल मोह नष्ट करने वाला ही ग्रन्थ नहीं मानेंगे। सनातन भारत को आज के हालातों में गीता जैसे कालजयी ग्रन्थ के संदेशों की सख्त जरूरत है।
प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद ने शनिवार को कनाड़िया रोड, मोर्या हिल्स स्थित कुसुम देवी छावछरिया सभागृह पर सूठीबाई दौलतराम पारमार्थिक न्यास की मेजबानी में चल रहे दिव्य गीता सत्संग के द्वितीय दिवस पर आयोजित सत्संग में उपस्थित शहर के प्रबुद्ध और गणमान्यजनों को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य और प्रेरक विचार रखे। प्रारंभ में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, यजमान समूह की ओर से बालकृष्ण छावछरिया, वरिष्ठ समाजसेवी पुरुषोत्तम अग्रवाल (अग्रवाल ग्रुप), सुशीला देवी अग्रवाल, पूर्व राज्यपाल वीएस कोकजे, सचिव कुलभूषण मित्तल कुक्की, दिनेश मित्तल, मनोरंजन मिश्रा, विकास गुप्ता, सीए पंकज गुप्ता, डॉ. निशा जोशी, निर्मल रामरतन अग्रवाल, विष्णु बिंदल, पार्षद पराग लोंढे, सौगात मिश्रा, एसएन गोयल, मुकेश राजावत, राजेश गर्ग, शिव जिंदल आदि ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्वलन कर सत्संग का शुभारंभ किया। ग्लोबल इंस्पीरेशन एनलाइटनमेंट आर्गेनाइजेशन ऑफ़ भगवद गीता (जीओ गीता) के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री प्रदीप मित्तल (दिल्ली) ने महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के निर्देशन में दुनिया के विभिन्न देशों में गीता के प्रचार प्रसार हेतु किए जा रहे कार्यों का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया सहित अनेक देशों की संसद में गीताजी की स्थापना की जा चुकी है। अनेक अस्पतालों में भी गीता पाठ करने और सुनने की व्यवस्था लागू की गई है। कुरुक्षेत्र में गीता शोध संस्थान सहित गीता पर आधारित अनेक गतिविधियाँ देश-विदेश के पर्यटकों और विद्वानों के लिए आकर्षण एवं श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं। समापन अवसर पर आरती में सांसद शंकर लालवानी, विधायक महेंद्र हार्डिया, विधायक मधु वर्मा, पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा, पूर्व पार्षद सूरज कैरो, हरिनारायण यादव, मोहन सेंगर, डॉ. आर के गौड़, खजराना गणेश मंदिर के पुजारी पं. अशोक भट्ट, प्रशांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों ने भी शामिल होकर महामंडलेश्वरजी से आशीर्वाद प्राप्त किए। स्वामी ज्ञानानंद ने पूर्व राज्यपाल वीएस कोकजे एवं महापौर पुष्यमित्र भार्गव को गीता की प्रति भेंट की। कार्यक्रम में लायंस क्लब के अनेक पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे।
स्वामी ज्ञानानंद ने अपने प्रवचनों का श्रीगणेश “श्रीकृष्ण कृपा कर दो ऐसी गीतामय जीवन बन जाए” भजन के साथ किया। उन्होंने कहा कि अच्छा डॉक्टर वही होता है जो रोग की सही पहचान कर ले। भगवान कृष्ण ने अर्जुन की नब्ज देखकर उसके रोग को पहचान लिया। गीता का प्रारंभ मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ होता है। यदि कान हमारे यहाँ पर हैं और मन कहीं और है तो सत्संग अंदर नहीं उतरेगा। याद रखना मन का विषय है। मन सत्संग में नहीं रहेगा तो कुछ भी याद नहीं रहेगा। मन में क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष भी निवास करते हैं। गीता का सत्संग सीधा चिंतन है, प्रेरणा है, दर्शन है। गीता उपदेश भी है और उपचार भी है, गीता मानवता का श्रृंगार भी है। अर्जुन ऐसा समग्र पात्र है जो कभी हारा नहीं। व्यक्ति कई बार क्रोध, काम, लोभ जैसी वृत्तियों के कारण हार जाता है। आज समाज में दुराचार, बलात्कार, भ्रष्टाचार और अनाचार जैसी वृत्तियाँ मौजूद हैं। अर्जुन ने हमेशा मूल्यों का आदर किया और परम्पराओं का पालन भी। अहंकार और विनम्रता का अंतर दुर्योधन और अर्जुन के आचरण से समझ सकते हैं। लोग अपने घरों में इस डर से महाभारत नहीं रखते कि घर में महाभारत हो जाएगी। हकीकत तो यह है कि मन के विचलन और घरों के क्लेश से मुक्ति के लिए महाभारत जरुर रखना चाहिए। आज हमारे बच्चों को संस्कारों की जरूरत है। अनेक बच्चे पिता से नाराज होकर बात ही नहीं करते। गीता उन्हें सिखाएगी कि बड़ों से कैसे बात की जाती है। मनुष्य का सम्मान उसकी बाहरी आकृति से नहीं उसके आन्तरिक सद्गुणों से प्रेरित होता है। बाह्य आकृति से सम्मान होता तो सूर्पनखा को सम्मान मिलता, शबरी को नहीं। आज लाखों वर्ष बाद भी शबरी का सम्मान सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि मोह और प्रेम में अंतर है। जहाँ मोह होता है वहां स्वार्थ होता है, और जहाँ प्रेम होता है वहां परमार्थ। मोह सत्ता के लिए होता है और प्रेम सेवा के लिए। मोह संकीर्णता के लिए और मोह उदारता के लिए होता है। मोह और प्रेम में अंतर देखना है तो राम और भरत के प्रेम में देखें। पूरी दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहाँ चरण पादुकाओं ने 14 वर्ष तक सिंहासन पर बैठकर राजपाठ चलाया हो। गीता कर्तव्य निष्ठा को जागृत करती है। मोह होगा तो स्वार्थ बढेगा और प्रेम होगा तो कर्तव्य का भाव आएगा। मोह अपने भले के लिए होता है और प्रेम दूसरों की मदद के लिए। स्वार्थ लेने की भावना रखता है और परमार्थ देने की। दुनिया में ऐसा कोई टॉनिक और औषधि नहीं है जो मन के रोगों को ठीक कर सके। किसी शॉपिंग मॉल या बाजार में मन के रोगों की दवाई नहीं मिलेगी। एकमात्र गीता ही ऐसा ग्रन्थ है जो हमें अपने कर्तव्यों का बोध भी कराता है और अपने नैतिक मूल्यों के सम्मान का भाव भी सृजित करता है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष में पंच परिवर्तन की बात भी पूरी तरह गीता पर ही आधारित है। कुटुंब प्रबोधन के रूप में एक आदर्श गृहस्थ के निर्माण में भी गीता की ही भूमिका है। इस वर्ष अधिक मास आ रहा है जिसे मल मास भी कहते हैं। जीओ का आह्वान है कि इस मल मास को हम गीता के 15 वें अध्याय का पाठ कर निर्मल मास में बदलने का पुरुषार्थ करें।
स्कूली बच्चों को आशीर्वचन – गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने शनिवार को सुबह टेलीफोन नगर स्थित शेरिंगवुड स्कूल के बच्चों को गीता के माध्यम से श्रेष्ठ संस्कारों की सीख देते हुए उन्हें देश का सुशील और संस्कारित नागरिक बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। करीब एक घंटे तक वे स्कूल में रहे और वहां की शिक्षा पद्धति, व्यवस्थाओं और स्टाफ से मिलकर उन्हें भी आशीर्वाद प्रदान किए।
रविवार को दोपहर 3 बजे से होंगे प्रवचन – कार्यक्रम समन्वयक कुलभूषण मित्तल कुक्की ने बताया कि रविवार 8 फरवरी को दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक मोर्या हिल्स कनाडिया रोड स्थित कुसुमदेवी छावछरिया सभागृह में प्रख्यात गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद के आशीर्वचन होंगे। कथा स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए बैठक व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, निशुल्क वाहन पार्किंग, साफ़-सफाई, सुरक्षा, प्राथमिक चिकित्सा सहित अनेक व्यवस्थाएं की गई हैं।
